पर्याप्त स्टॉक एवं बेहतर आगामी परिदृश्य से चीनी बाजार पर संकट नहीं होने का दावा

19-Mar-2025 03:29 PM

नई दिल्ली। प्राइवेट चीनी मिलों की शीर्ष संस्था- इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके दावा किया है कि घरेलू चीनी उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के लिए कोई संकट नहीं है

और इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति भी सुगम बनी रहेगी क्योंकि एक तो चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और दूसरे, आगामी सीजन का परिदृश्य भी सकारात्मक है।

इस्मा के अनुसार 1 अक्टूबर 2024 को मौजूदा मार्केटिंग सीजन शुरू होने के समय उद्योग के पास 80 लाख टन चीनी का पिछला बकाया स्टॉक मौजूद था जबकि चालू सीजन में लगभग 264 लाख टन चीनी के उत्पादन की संभावना है।

इसमें से 280 लाख टन का घरेलू उपयोग तथा 10 लाख टन का निर्यात होगा और मार्केटिंग सीजन के अंत में यानी 30 सितम्बर 2025 को उद्योग के पास 54 लाख टन चीनी का अधिशेष अधिशेष स्टॉक बच जाएगा। इससे घरेलू खपत के लिए पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सकती है। 

एसोसिएशन के मुताबिक 1 अक्टूबर 2024 से 15 मार्च 2025 के दौरान देश में करीब 238 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ जबकि लगभग 200 इकाइयों में गन्ना की क्रशिंग अभी जारी है।

महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में अधिकांश चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं लेकिन कर्नाटक एवं तमिलनाडु में जून-जुलाई के दौरान गन्ना क्रशिंग का विशेष सत्र आयोजित होगा जिससे चीनी के उत्पादन में वृद्धि होगी। 

एसोसिएशन ने 2025-26 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में चीनी का बेहतर उत्पादन होने की उम्मीद जाहिर की है। ऐतिहासिक या परम्परागत रूख से पता चलता है

कि सीजन के शुरूआती दो महीनों- अक्टूबर तथा नवम्बर में 43 लाख टन से अधिक चीनी का उत्पादन होगा जबकि 54 लाख टन के बकाया स्टॉक के साथ कुल उपलब्धता 100 लाख टन के करीब पहुंच सकती है।

एसोसिएशन ने आगाह किया है कि कुछ वर्ग गलत एवं भ्रामक जानकारी देकर देश को गुमराह कर रहे हैं। इसका इरादा अफवाहों के जरिए चीनी के बाजार को अस्थिर करना और कीमतों में तेजी को हवा देना है। 

इस्मा का कहना है कि सरकार ने 2024-25 सीजन के लिए 10 लाख टन चीनी का जो निर्यात कोटा जारी किया है उसका घरेलू उद्योग पर काफी सकारात्मक असर पड़ा है और मिलर्स की वित्तीय स्थिति में काफी हद तक स्थिरता आ गई है।

सरकार की नीति से देश के साढ़े पांच करोड़ गन्ना उत्पादकों को सीधा लाभ मिल रहा है और चीनी मिलों को गन्ना के बकाया मूल्य का भुगतान सही समय पर करने में आसानी हो रही है। मध्य मार्च तक गन्ना मूल्य बकाया के लगभग 80 प्रतिशत भाग का भुगतान किया जा चुका था।