पश्चिम-अफ्रीकी देशों में भारतीय चावल की जोरदार मांग

06-Dec-2024 05:18 PM

नैरोबी । अफ्रीका महाद्वीप के पश्चिमी भाग में अवस्थित देश फिलहाल भारतीय गैर बासमती चावल की खरीद में जबरदस्त दिलचस्पी दिखा रहे हैं और अगले एक दो महीनों तक इसका सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

दरअसल भारत में धान की फसल की जोरदार कटाई-तैयारी होने से चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ती जा रही है और कीमतों में स्थिरता बनी हुई है इसे देखते हुए अफ्रीकी देशों की सक्रियता बढ़ गई है। 

दरअसल जब सितम्बर में भारत सरकार ने गैर बासमती सफेद चावल के निर्यात को प्रतिबंध से मुक्त करने की घोषणा की थी तब निर्यातकों को काफी ख़ुशी हुई थी क्योंकि इस पर कोई निर्यात शुल्क नहीं लगाया गया था।

लेकिन एक अड़चन रह गई। इस चावल के लिए 490 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) निर्धारित कर दिया गया। इससे निर्यात शिपमेंट पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका थी क्योंकि पाकिस्तान एवं म्यांमर के चावल का ऑफर मूल्य इससे नीचे था और थाईलैंड का चावल भी ज्यादा महंगा नहीं था।

जब भारतीय निर्यातकों ने सरकार को इस अड़चन के बारे में सूचित किया तब उसे भी दूर कर दिया गया। अब भारतीय गैर बासमती साबुत चावल (कच्चा एवं सेला दोनों) पर न तो कोई निर्यात प्रतिबंध लागू है और न ही सीमा शुल्क लगता है। 

इसके फलस्वरूप अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल एक बार फिर अन्य प्रतिद्वंदी निर्यातक देशों की तुलना में प्रतिस्पर्धी स्तर पर पहुंच गया है।

अफ्रीका महाद्वीप के अनेक परम्परागत आयातक देश लम्बे समय से सस्ते भारतीय चावल का इंतजार कर रहे थे और जब उन्हें इसका अवसर प्राप्त हुआ तब इसकी खरीद में उनकी सक्रियता बढ़ गई। घरेलू प्रभाग में चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी हुई है।