रबी फसलों का बिजाई क्षेत्र सामान्य औसत क्षेत्रफल के 88 प्रतिशत तक पहुंचा
18-Dec-2024 06:15 PM
नई दिल्ली। पिछले साल की तुलना में चालू रबी सीजन के दौरान गेहूं तथा धान के उत्पादन क्षेत्र में इजाफा हुआ है मगर दलहन, तिलहन एवं मोटे अनाजों के बिजाई क्षेत्र में गिरावट देखी जा रही है।
अलग-अलग फसलों का आंकलन दर्शाता है कि चना का रकबा बढ़ा है, मक्का का क्षेत्रफल स्थिर (गत वर्ष के लगभग बराबर) तथा सरसों एवं जौ का क्षेत्रफल घटा है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस बार किसान सरसों के बजाए गेहूं एवं चना की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं।
रबी फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र पिछले सप्ताह के अंत में गत वर्ष के 556.67 लाख हेक्टेयर से 0.4 प्रतिशत बढ़कर 558.80 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो सामान्य औसत क्षेत्रफल (पंचवर्षीय औसत) 635.60 लाख हेक्टेयर से महज 12 प्रतिशत पीछे था।
रबी सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न-गेहूं का उत्पादन क्षेत्र 284.17 लाख हेक्टेयर से 3.1 प्रतिशत उछलकर 293.11 लाख हेक्टेयर तथा धान का क्षेत्रफल 11.39 लाख हेक्टेयर से 6 प्रतिशत बढ़कर 12.07 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
दूसरी ओर सरसों का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 90.40 लाख हेक्टेयर से 5.5 प्रतिशत घटकर इस बार 85.56 लाख हेक्टेयर तथा मूंगफली का रकबा 2.81 लाख हेक्टेयर से 5.3 प्रतिशत गिरकर 2.62 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।
सैफ्लावर का क्षेत्रफल 57 हजार हेक्टेयर पर स्थिर रहा। रबी तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 96.96 लाख हेक्टेयर से 5.5 प्रतिशत गिरकर इस बार 91.60 लाख हेक्टेयर रह गया।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सरसों के बिजाई क्षेत्र में भारी गिरावट आने का मुख्य कारण नवम्बर तक तापमान का काफी ऊंचा रहना था जबकि उसी समय राजस्थान में इसकी सर्वाधिक बिजाई होती है।
राजस्थान भारत में सरसों का सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त है जो कुल राष्ट्रीय उत्पादन में 40 प्रतिशत से अधिक का योगदान करता है। ऊंचे तापमान के कारण उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं हरियाणा के कुछ जिलों में भी सरसों की बिजाई प्रभावित हुई।
