रबी फसलों का परिदृश्य
03-Jan-2026 10:56 AM
अक्टूबर 2025 में आरंभ हुई रबी फसलों की बिजाई का अभियान अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। सिर्फ बिहार के कुछ भागों में गेहूं तथा दक्षिण भारत में धान को छोड़कर देश के अन्य अधिकांश इलाकों में रबी फसलों की खेती लगभग समाप्त हो चुकी है।
परम्परागत रिवाज के अनुरूप इस बार भी कुछ फसलों के उत्पादन क्षेत्र में वृद्धि हुई है तो कुछ अन्य फसलों के बिजाई क्षेत्र में कमी आई है।
जिन फसलों के क्षेत्रफल में इजाफा हुआ है उसमें गेहूं, धान, चना, मसूर, मक्का, जौ एवं सरसों तथा मूंगफली आदि के रकबे में गिरावट दर्ज की गई है। सरकार को उम्मीद है कि खाद्यान्न एवं तिलहनों का कुल उत्पादन नियत लक्ष्य तक पहुंच जाएगा लेकिन इसके लिए मौसम का अनुकूल होना आवश्यक है।
हालांकि देश के अधिकांश इलाकों में दिसम्बर माह के दौरान वर्षा का अभाव देखा गया लेकिन रबी फसलों की हालत लगभग सामान्य बनी रही क्योंकि तापमान नीचे होने से मिटटी में नमी का ज्यादा अभाव नहीं हुआ।
जनवरी से मार्च की तिमाही में एक-दो अच्छी बारिश की आवश्यकता पड़ेगी अन्यथा किसानों को सिंचाई के लिए वैकल्पिक प्रबंध करना होगा।
बांधों-जलाशयों में जल स्तर घटता जा रहा है और इसलिए पानी का उपयोग सही ढंग से करना आवश्यक होगा। फिलहाल तमाम रबी फसलें संतोषजनक स्थिति में हैं और इसलिए गंभीर चिंता की बात नहीं है। वैसे ला नीना मौसम चक्र भी सक्रिय है जिससे शीतकाल में बारिश की उम्मीद की जा सकती है।
दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्व मानसून की सक्रियता से वर्षा हो रही है। गेहूं का न केवल रकबा बढ़ा है बल्कि 73 प्रतिशत क्षेत्र में मौसम प्रतिरोधी किस्म के बीज की खेती हुई है।
चना तथा सरसों की हालत अच्छी बताई जा रही है। अगले महीने से इसकी छिटपुट आवक शुरू हो जाएगी। मक्का और जौ का उत्पादन बेहतर होने के आसार हैं।
