रबी कालीन मोटे अनाजों का रकबा गत वर्ष से कुछ पीछे

28-Jan-2025 05:36 PM

नई दिल्ली । उठते-गिरते रबी कालीन मोटे अनाजों का रकबा अंततः पिछले साल के अत्यन्त निकट पहुंच गया जिसके लिए मुख्यतः मक्का के क्षेत्रफल में हुई अच्छी बढ़ोत्तरी को जिम्मेवार माना जा सकता है।

ज्वार के क्षेत्रफल में भारी गिरावट आ गई और जौ का रकबा भी कुछ पीछे रह गया मगर मक्का के बिजाई क्षेत्र में लगभग 2 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हो गई जिसकी उम्मीद पहले से ही थी। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चालू रबी सीजन में श्री अन्न सहित मोटे अनाजों का कुल उत्पादन क्षेत्र 55.67 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 55.89 लाख हेक्टेयर से 22 हजार हेक्टेयर कम लेकिन सामान्य औसत क्षेत्रफल 53.46 लाख हेक्टेयर से 2.21 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। बिजाई की प्रक्रिया लगभग समाप्त हो चुकी है।

पिछले साल की तुलना में चालू रबी सीजन के दौरान ज्वार का उत्पादन क्षेत्र 26.60 लाख हेक्टेयर से घटकर 24.35 लाख हेक्टेयर तथा जौ का रकबा 6.70 लाख हेक्टेयर से गिरकर 6.62 लाख हेक्टेयर पर अटक गया लेकिन मक्का का बिजाई क्षेत्र  21.75 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 23.67 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।

सामान्य औसत क्षेत्रफल के सापेक्ष ज्वार का उत्पादन क्षेत्र लगभग बराबर रहा मगर मक्का एवं जौ का बिजाई क्षेत्र ऊंचा हो गया। 

रबी सीजन में बाजरा एवं रागी के साथ-साथ स्मॉल मिलेट्स की खेती भी सीमित क्षेत्रफल में होती है जबकि इसका उत्पादन मुख्यत: खरीफ सीजन में होता है।

खरीफ सीजन में ज्वार तथा मक्का की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है। मक्का में जबरदस्त औद्योगिक मांग बनी हुई है जिससे इसका भाव 2225 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी ऊंचा चल रहा है।