रबी कालीन धान का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से आगे मगर औसत क्षेत्रफल से पीछे

29-Jan-2025 07:51 PM

नई दिल्ली । हालांकि केन्द्रीय पूल में तथा खुले बाजार में चावल का भरपूर स्टॉक मौजूद है और निर्यात की बेहतर रफ्तार के बावजूद इसके दाम में काफी हद तक स्थिरता बनी हुई है लेकिन फिर भी धान की खेती के प्रति किसानों के उत्साह में कमी नहीं आ रही है।

2024-25 के खरीफ सीजन में राष्ट्रीय स्तर पर धान का उत्पादन क्षेत्र 2023-24 सीजन के 404.50 लाख हेक्टेयर से 9 लाख हटकेयर बढ़कर 413.50 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा था और अब रबी सीजन में भी यह 30.38 लाख हेक्टेयर से करीब 5 लाख हेक्टेयर बढ़कर 35.15 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। लेकिन यह रकबा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 42.02 लाख हेक्टेयर से लगभग सात लाख हेक्टेयर पीछे रह गया। 

भारत में धान की खेती मुख्यत: खरीफ सीजन में होती है जबकि रबी सीजन में भी देश के कुछ राज्यों में इसका उत्पादन होता है। इसके अलावा अत्यन्त सीमित क्षेत्रफल में ग्रीष्मकाल या जायद सीजन में भी इसे उपजाया जाता है। खरीफ कालीन धान की फसल काटी जा चुकी है और इसकी सरकारी खरीद भी अंतिम चरण में पहुंच गई है।

रबी कालीन धान की नई फसल की कटाई-तैयारी अप्रैल में शुरू होने की संभावना है जबकि कहीं-कहीं अगैती फसल कुछ जल्दी आ सकती है।

कुछ  परम्परागत उत्पादक राज्यों में ही रबी कालीन धान की खेती एवं पैदावार होती है और वहां इसकी सरकारी खरीद भी की जाती है। 

भारत सरकार सभी किस्मों एवं श्रेणियों के साबुत चावल के निर्यात को नियंत्रणों, सीमा शुल्क तथा मेप से मुक्त कर चुकी है और इसलिए इसके शिपमेंट में बढ़ोत्तरी के संकेत मिल रहे हैं।

केन्द्रीय पूल में चावल का विशाल स्टॉक मौजूद है जिसे घटाने के लिए सरकार तरह-तरह का प्रयास कर रही है। कुल आर्थिक लागत से काफी कम मूल्य पर चावल बेचने की कोशिश की जा रही है।

राज्यों को सस्ते दाम पर अपनी जरूरत के अनुसार खाद्य निगम के गोदामों से चावल का उठाव करने की अनुमति दी गई है और इस चावल का मूल्य भी निश्चित कर दिया गया है।