रबी कालीन धान का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से आगे
13-Jan-2026 05:14 PM
नई दिल्ली। दक्षिणी राज्यों में एक तरफ खरीफ कालीन धान की नई फसल की आवक हो रही है तो दूसरी ओर रबी कालीन धान की खेती भी जारी है।
हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर करीब 75-80 प्रतिशत धान-चावल का उत्पादन खरीफ सीजन के दौरान होता है मगर तेलंगाना जैसे राज्यों के लिए रबी कालीन धान भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। दक्षिणी राज्यों में चालू माह के अंत तक धान की खेती जारी रहने की संभावना है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि मौजूद रबी सीजन के दौरान 9 जनवरी 2025 तक धान का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 21.71 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 19.49 लाख हेक्टेयर से 2.22 लाख हेक्टेयर अधिक है।
लेकिन यह आंकड़ा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 42.93 लाख हेक्टेयर तक पिछले रबी सीजन के कुल उत्पादन क्षेत्र 44.73 लाख हेक्टेयर से अभी बहुत पीछे है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2025-26 के रबी सीजन में 158.60 लाख टन चावल के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है जबकि खरीफ सीजन में उत्पादन बढ़कर 12.45 करोड़ टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया है।
खरीफ कालीन धान की सरकारी खरीद में अच्छी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है जिससे केन्द्रीय पूल में चावल का स्टॉक स्वाभाविक रूप से काफी बढ़ जाएगा। ज्ञात हो कि सरकारी गोदामों में पहले से ही चावल का विशाल स्टॉक मौजूद है और इसकी निकास की गति धीमी देखी जा रही है।
सामान्य श्रेणी के गैर बासमती धान का भाव ऊंचा चल रहा है और किसानों को अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है। इसके फलस्वरूप रबी कालीन धान की खेती में उसका उत्साह एवं आकर्षण बरकरार है।
जनवरी के अंत तक इसकी-रोपाई होती रहेगी जबकि नई फसल की कटाई-तैयारी अप्रैल में आरंभ होगी। केन्द्रीय पूल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उस धान की भी अच्छी खरीद की जाएगी।
