रोड टेप स्कीम पर सकारात्मक निर्णय

04-Oct-2025 11:04 AM

केन्द्र सरकार ने अमरीकी टैरिफ को ध्यान में रखते हुए निर्यातकों की सुविधा एवं मदद के लिए रोड टेप स्कीम की समय सीमा को अगले छह माह तक बढ़ाने का जो सकारात्मक निर्णय लिया है उससे भारतीय उत्पादों के निर्यात प्रदर्शन की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद की जा सकती है।

इस रोड टेप स्कीम की समय सीमा 30 सितम्बर 2025 को समाप्त हो रही थी मगर अब इसे 31 मार्च 2026 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। इस आशंका की अधिसूचना जारी की जा चुकी है।

इसके फलस्वरूप यह स्कीम आगे भी प्रभावी रहेगी और घरेलू सीमा शुल्क क्षेत्र में स्थित इकाइयों से होने वाले निर्यात अग्रिम अधिकार धारकों, विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में क्रियाशील इकाइयों तथा निर्यातोन्मुखी इकाइयों को इसका फायदा मिलता रहेगा।

रोड टेप स्कीम के अंतर्गत होने वाले निर्यात के लिए वित्तीय लाभ प्रदान किया जाता है जिससे निर्यातकों को काफी राहत मिलती है। भारतीय वाणिज्यिक वस्तुओं एवं सेवाओं के एक अग्रणी निर्यात बाजार- अमरीका में 50 प्रतिशत का भारी-भरकम सीमा शुल्क लागू होने से भारत के निर्यातकों की चुनौती बढ़ गई है।

इसके प्रभाव को न्यूनतम स्तर तक लाने के लिए भारत सरकार हर संभव कदम उठा रही है जिसमें रोड टेप स्कीम की समय सीमा का विस्तार भी शामिल है।

इससे पूर्व रूई पर लगे 11 प्रतिशत के आयात शुल्क को वापस लिया जा चुका है ताकि स्वदेशी टैक्सटाइल उद्योग को विदेशों से सस्ते कच्चे माल का आयात करने तथा तैयार उत्पादों का लागत खर्च घटाने में सहायता मिल सके।

ध्यान देने की बात है कि निर्यात संवर्धन के उद्देश्य से केन्द्र सरकार ने इस अग्रणी निर्यात प्रोत्साहन योजना की शुरुआत वर्ष 2021 से की थी और इसके अंतर्गत निर्माताओं को इनपुट पर भुगतान की गई गैर ब्रेडिटेबल केन्द्रीय प्रांतीय एवं स्थानीय निकाय की लेवी का रिफंड देने का प्रावधान किया गया था ताकि लागत खर्च में कमी आ सके। 

यह स्कीम इस सिद्धांत पर आधारित है कि टैक्स का निर्यात नहीं किया जाना चाहिए। यह स्कीम निर्यात की शून्य रेटिंग सुनिश्चित करती है जिससे निर्यात काफी हद तक प्रतिस्पर्धी हो जाता है।

केन्द्रीय आम बजट में इस स्कीम के लिए वित्त वर्ष 2024-25 में 16,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे जिसे वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़ाकर 18,232 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है।

चालू वित्त वर्ष के आरम्भिक पांच महीनों में यानी अप्रैल-अगस्त 2025 के दौरान वाणिज्यिक वस्तुओं का निर्यात 25 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 184 अरब डॉलर पर पहुंच गया जबकि अमरीका को होने वाला निर्यात 18 प्रतिशत उछलकर 40 अरब डॉलर से ऊपर पहुंचा। आगे भी इस रफ्तार को बरकरार रखने की आवश्यकता है।