रिफाइंड खाद्य तेलों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने की सरकारी नीति प्रशंसनीय
21-Aug-2025 11:58 AM
मुम्बई। केन्द्र सरकार ने स्वदेशी रिफाइनिंग उद्योग को प्रोत्साहन देने और विदेशों से रिफाइंड खाद्य तेलों के आयात को सीमित रखने की जो रणनीति बनाई है वह प्रशंसनीय एवं लाभकारी है और इससे रिफाइनर्स को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। इस रणनीति के तहत क्रूड खाद्य तेल तथा रिफाइंड खाद्य तेल पर आयात शुल्क के बीच अंतर बढ़ा दिया गया है।
पहले यह अंतर महज 8.25 प्रतिशत का था मगर 31 मई 2025 से बढ़कर 19.25 प्रतिशत हो गया। इसका सकरात्मक परिणाम भी सामने आने लगा है। जुलाई 2025 में रिफाइंड खाद्य तेल (मुख्यतः आरबीडी पामोलीन) का आयात लुढ़ककर मात्र 5 हजार टन के करीब रह गया जबकि जून 2025 में 1.63 लाख टन तथा जुलाई 2024 में 1.36 लाख टन रिफाइंड खाद्य तेल का आयात किया गया था।
सरकार की इस नई नीति से अब देश में क्रूड श्रेणी के पाम तेल, सोयाबीन तेल तथा सूरजमुखी तेल का आयात बढ़ने के संकेत मिलने लगे हैं और भारतीय रिफाइनर्स को इंडोनेशिया तथा मलेशिया से आयात बढ़ने के संकेत मिलने लगे हैं और भारतीय रिफाइनर्स को इंडोनेशिया तथा मलेशिया से आयात होने वाले आरबीडी पामोलीन के आयात से अनावश्यक एवं आसमान प्रतिस्पर्धा करने की जरूरत नहीं पड़ रही है।
लेकिन नेपाल से विशाल मात्रा में रिफाइंड खाद्य तेलों का हो रहा आयात जरूरत भारतीय रिफाइनर्स को परेशान कर रहा है। साफ्टा संधि के तहत नेपाल से भारत में खाद्य तेलों का शुल्क मुक्त आयात हो रहा है जिस पर अंकुश लगाए जाने की सख्त आवश्यकता है।
विदेशों से रिफाइंड खाद्य तेलों के आयात को हतोत्साहित और घरेलू मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने की सरकारी नीति से स्वदेशी रिफाइनिंग उद्योग को अपनी क्रियाशील क्षमता का उपयोग बढ़ाने का अच्छा अवसर मिल रहा है और इससे घरेलू बाजार में खाद्य तेल की कीमतों को स्थिर रखने में भी सहायता मिल यही है।
देश के अंदर ही रिफाइंड खाद्य तेलों का पर्याप्त उत्पादन होने से रोजगार के नए अवसरों का निर्माण होगा और रिफाइनिंग उद्योग को काफी राहत मिलेगी।
भारत में मुख्यत: इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड से पाम तेल, अर्जेन्टीना एवं ब्राजील से सोयाबीन तेल तथा रूस, यूक्रेन एवं अर्जेन्टीना से सूरजमुखी तेल का आयात किया जाता है।
