रोगों-कीड़ों के प्रकोप से गन्ना की फसल प्रभावित होने के कारण चीनी का उत्पादन घट सकता है

09-Dec-2024 07:21 PM

नई दिल्ली । हालांकि केन्द्र सरकार ने अपने प्रथम अग्रिम अनुमान में 2023-24 सीजन की तुलना में 2024-25 सीजन के दौरान गन्ना की पैदावार 4531.58 लाख टन से 132.28 लाख टन घटकर 4399.30 लाख (करीब 44 करोड़) टन पर सिमट जाने की संभावना व्यक्त की है लेकिन उद्योग समीक्षकों का मानना है कि वास्तविक उत्पादन सरकारी अनुमान से भी कम हो सकता है। 

विश्लेषकों के अनुसार देश के तीनों शीर्ष गन्ना उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक में रोगों-कीड़ों एवं प्राकृतिक आपदाओं के प्रकोप से फसल प्रभावित हुई है।

उत्तर प्रदेश के खासकर मुरादाबाद संभाग में रेड रोट तथा टॉप बोरर कीट के आघात से गन्ना की औसत उपज दर में भारी गिरावट आने के संकेत मिल मिल रहे हैं जिससे चीनी के उत्पादन में गिरावट आने की आशंका है।

अक्टूबर-नवम्बर 2024 के दो महीनों के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चीनी के उत्पादन में 35.4 प्रतिशत की जोरदार कमी दर्ज की गई। इसके तहत खासकर महाराष्ट्र तथा कर्नाटक में उत्पादन का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा। 

गन्ना की पैदावार घटने के बावजूद यदि एथनॉल के निर्माण में इसका उपयोग बढ़ाया गया तो खाद्य उद्देश्य के लिए शुद्ध चीनी का उत्पादन और भी घट सकता है।

ज्ञात हो कि 2023-24 सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान एथनॉल के निर्माण में करीब 21 लाख टन चीनी के समतुल्य गन्ना का उपयोग किया गया था जबकि 2024-25 के वर्तमान सीजन में इसकी मात्रा बढ़कर 40 लाख टन से ऊपर पहुंच जाने की संभावना है।

इसका सीधा असर चीनी के उत्पादन पर पड़ना स्वाभाविक ही है। गुड़-खांडसारी के निर्माण में भी गन्ना का इस्तेमाल बढ़ने के आसार हैं क्योंकि इसका बाजार भाव आकर्षक स्तर पर चल रहा है।

हालांकि चीनी का पिछला बकाया स्टॉक अधिक होने से 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता में कोई समस्या नहीं आएगी लेकिन उत्पादन घटने पर मांग एवं आपूर्ति के बीच जटिलता कुछ बढ़ सकती है।