रुई का शुल्क मुक्त आयात बंद होने से वस्त्र उद्योग चिंतित

03-Jan-2026 12:44 PM

नई दिल्ली। अगस्त 2025 में केंद्र सरकार ने जिस खतरे की आशंका के आधार पर रुई के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने का निर्णय किया था वह खतरा अभी दूर नहीं हुआ है लेकिन फिर भी सरकार ने अपना निर्णय वापस ले लिया है विदेशो से रुई के शुल्क मुक्त आयात को समय सीमा 31 दिसम्बर 2025 को समाप्त हो गई

और इसे आगे बढ़ाने के लिए कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई। इसके फलस्वरूप रुई के आयात पर 11 प्रतिशत का सीमा शुल्क पुनः प्रभावी हो गया जो अगस्त 2025 से पहले लागू था। इसके साथ ही अब शुल्क मुक्त आयात का रास्ता बंद हो गया है। 

संयुक्त राज्य अमरीका (यूएसए) भारतीय वस्त्र उत्पादों का सबसे प्रमुख बाजार रहा है लेकिन वहां इसके आयात पर 50 प्रतिशत का भारी भरकम टैरिफ लगा दिया गया है इतना ही नहीं बल्कि अमरीका अब भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता पर हस्ताक्षर करने में भी जान बूझकर देरी कर रहा है

जबकि इस संधि का सौदा पहले ही तैयार हो चुका है और दोनों पक्ष इससे संतुष्ट भी है। ऊंचे टैरिफ के कारण अमरीकी बाजार में भारतीय वस्त्र उत्पादों की प्रतिस्पर्धी क्षमता घट गई है और वहां इसका निर्यात प्रदर्शन कमजोर पड़ने लगा है। 

बिजाई क्षेत्र में कमी आने तथा प्राकृतिक आपदाओं से फसल को नुकसान होने के कारण 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितंबर) में कपास का घरेलू उत्पादन घटकर 300 लाख गांठ से नीचे आ जाने का अनुमान है

हालांकि शुल्क मुक्त आयात के कारण कपास का भाव अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे चल रहा था मगर आगामी समय में इसकी कीमतों में कुछ सुधार आने की संभावना है।

सरकारी एजेंसी-भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा किसानो से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भारी मात्रा में कपास की खरीद की जा रही है जिसकी बिक्री के बाद में कुछ ऊंचे दाम पर भी जा सकती है। 

रुई का वैश्विक बाजार भाव अभी ज्यादा तेज नहीं हुआ है लेकिन 11 प्रतिशत के सीमा शुल्क के साथ आयातित रुई से निर्मित वस्त्र उत्पादों का लागत खर्च ऊंचा होना स्वाभाविक है। जिसमे उद्योग एवं निर्यातकों को मार्जिन में कमी आ जाएगी।