रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद गेहूं का निर्यात खुलने की उम्मीद नहीं

14-Jun-2025 12:39 PM

नई दिल्ली। हालांकि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने गेहूं का घरेलू उत्पादन 2023-24 सीजन के 1132.90 लाख टन से करीब 2 प्रतिशत बढ़कर 2024-25 के वर्तमान रबी सीजन में 1154.10 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है जो आंतरिक मांग एवं जरूरत से काफी ज्यादा है लेकिन फिर भी सरकार फिलहाल गेहूं एवं इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों- आटा, मैदा एवं सूजी आदि के व्यापारिक निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने के मूड में नहीं है। सरकार की पहली प्राथमिकता देश की विशाल जनसंख्या के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। घरेलू प्रभाग में गेहूं एवं इसके उत्पादों की पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता सुनिश्चित करना है। घरेलू प्रभाग में तेजी को नियंत्रित करने का हर संभव प्रयास कर रही है और आगे भी उसकी यह कोशिश जारी रह सकती है।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने 13 मई 2022 को गेहूं के व्यापारिक निर्यात पर पहली बार प्रतिबंध लगाया था और तभी से यह बरकरार हैं। वर्ष 2022 में ही गेहूं उत्पादों के व्यापारिक निर्यात को भी प्रतिबंधित किया गया था। चीन के बाद भारत दुनिया में गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक एवं खपतकर्ता  देश है। लेकिन भारत गेहूं एवं इसके उत्पादों का स्थायी या परम्परागत निर्यातक देश नहीं रहा है। कुछ वर्ष पूर्व देश में उत्पादन एवं स्टॉक की पोजीशन बेहतर होने से इसके निर्यात की गति तेज हुई थी लेकिन शीघ्र ही घरेलू बाजार भाव काफी ऊंचा होने एवं केन्द्रीय पूल के लिए सरकारी खरीद में जबरदस्त गिरावट आने से सरकार को इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लेना पड़ा। 

उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2021 के रबी मार्केटिंग सीजन में केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की सरकारी खरीद उछलकर 433.44 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई थी मगर अगले साल यानी वर्ष 2022 में यह लुढ़ककर 187.92 लाख टन के निम्न स्तर पर सिमट गई। इसके बाद 2023 में 262 लाख टन एवं 2024 में 266 लाख टन गेहूं खरीदा गया मगर यह नियत लक्ष्य एवं उम्मीद से बहुत कम रहा। वर्ष 2025 में गेहूं की सरकारी खरीद बढ़कर 300 लाख टन से कुछ ऊपर पहुंची है जिससे कल्याणकारी योजनाओं में आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने में सहायता मिलेगी मगर सरकार निर्यात खोलकर कोई अतिरिक्त जोखिम नहीं उठाना चाहती है।