रुपए के अवमूल्यन से चावल का निर्यात बढ़ने की उम्मीद
24-Dec-2025 11:29 AM
नई दिल्ली। शानदार घरेलू उत्पादन, स्थिर भाव एवं रुपया के अवमूल्यन से भारतीय चावल का निर्यात इस बार नई ऊंचाई पर पहुंचने की उम्मीद है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चालू वर्ष के शुरूआती 10 महीनों में यानी जनवरी-अक्टूबर 2025 के दौरान चावल का निर्यात तेजी से बढ़कर 184.90 लाख टन पर पहुंच गया
जो पिछले साल की समान अवधि के शिपमेंट से 37 प्रतिशत अधिक रहा। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल का दाम फिलहाल प्रतिस्पर्धी स्तर पर चल रहा है जिसे देखते हुए निर्यातक संगठन का कहना है कि गत वर्ष की तुलना में इस बार चावल के कुल निर्यात में लगभग 25 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है।
सरकार के पास चावल और गेहूं का भरपूर स्टॉक मौजूद है इसलिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए दूर-दूर तक कहीं कोई खतरा नहीं है। ऐसी हालत में सरकार को चावल के निर्यात पर किसी तरह का नियत्रण या अंकुश लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
घरेलू प्रभाग में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति अत्यन्त सुगम बनी हुई है और कीमतों में भी स्थिरता का माहौल बना हुआ है। निर्यातकों को अपने अनुबंधों को पूरा करने हेतु चावल प्राप्त करने में कोई कठिनाई नहीं हो रही है।
हालांकि ईरान में मौद्रिक संकट तथा अमरीका में 50 प्रतिशत के ऊंचे टैरिफ के कारण वहां बासमती चावल का निर्यात आंशिक रूप से प्रभावित होने की आशंका है लेकिन अन्य आयातक देशों में इसकी अच्छी मांग बनी हुई है।
फिलीपींस में पिछले तीन-चार महीनों से चावल के आयात पर प्रतिबंध लागू होने से वियतनाम को भारी कठिनाई हो रही है और उसे नए बाजारों की तरफ ध्यान देना पड़ रहा है।
इससे वैश्विक बाजार में चावल की आपूर्ति बढ़ गई है। फिलीपींस वियतनामी चावल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। उम्मीद की जा रही है कि अगले महीने से फिलीपींस में चावल के आयात पर लगा प्रतिबंध समाप्त हो जाएगा
और तब भारत को भी अपने निर्यात प्रदर्शन में सुधार लाने का अवसर मिल सकेगा। भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है और कुल वैश्विक निर्यात में करीब 42 प्रतिशत का योगदान देता है।
