राष्ट्रीय स्तर पर पीडीएस में मिलेट्स को शामिल करने पर जोर
30-Jan-2025 02:44 PM
हैदराबाद । विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में मिलेट्स को बड़े पैमाने पर सम्मिलित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है क्योंकि इससे एक तरफ खास एवं पोषण सुरक्षा को सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी तो दूसरी ओर सरकार को भी खर्च घटाने का अवसर मिल सकता है।
एक अग्रणी अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि वित्त वर्ष 2021-22 के लिए सरकार ने पीडीएस के लिए जितना बजट रखा था, वास्तविक खर्च उससे काफी अधिक हो गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक वर्तमान प्रणाली अनेक छिपे हुए आर्थिक एवं पर्यावरणीय खर्चों का संवाहक बनी हुई है। पीडीएस में मुख्यत: चावल तथा गेहूं के वितरण का प्रयास किया जा रहा है और मिलेट्स की उपेक्षा की जा रही है।
कुछ राज्यों में मिलेट्स का वितरण होता है लेकिन इसका दायरा बहुत सीमित है। समूचे देश में यदि चावल-गेहूं के विकल्प के तौर पर मिलेट्स के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए तो कई तरह के फायदे सामने आ सकते हैं।
इसके लिए किसानों को मिलेट्स का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना होगा और यह कोशिश रहनी चाहिए कि उत्पादकों को लाभप्रद मूल्य की वापसी हो सके। मिलेट्स के उत्पादन पर लागत खर्च कम बैठता है।
संस्थान के मुताबिक यदि पीडीएस में चावल के अंश में कटौती करके मिलेट्स की आपूर्ति बढ़ाई जाए तो खर्च में काफी बचत हो सकती है।
संस्थान की रिपोर्ट के मुताबिक चावल तथा गेहूं के आर्थिक एवं पर्यावरणीय खर्चों को शामिल करने पर 2021-22 के दौरान पीडीएस का कुल वास्तविक खर्च बढ़कर 45.30 अरब डॉलर पर पहुंच गया जबकि केन्द्रीय आम बजट में केवल 16.50 अरब डॉलर का खर्च बैठने का अनुमान लगाया गया था।
यदि 1 किलो चावल की जगह 1 किलो मिलेट्स का वितरण किया जाए तो प्रत्येक वर्ष इस वास्तविक खर्च में 1.37 अरब डॉलर की कमी आ सकती है।
