रिटेल पैक पर लागू 5 प्रतिशत का जीएसटी खाद्य में महंगाई का प्रमुख कारण
30-Aug-2024 05:21 PM
रायपुर । एक तरफ केन्द्र सरकार खाद्य मंगाई को घटाने के लिए तरह तरह का नियम लागू कर रही है जिसमें स्टॉक लिमिट भी शामिल है तो दूसरी ओर कुछ ऐसी नीतियां भी बनाती है जिससे खाद्यान्न का भाव स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
रायपुर (छत्तीसगढ़) के एक मशहूर व्यवसायी विजय गोयल ने कहा है कि देश में खाद्यान्न में बढ़ती महंगाई के लिए रिटेल पैक पर लगाया गया 5 प्रतिशत का जीएसटी ही मूल रूप से जिम्मेदार है।
विजय गोयल के अनुसार जीएसटी लागू होने से पूर्व गृह उद्योग एवं माइक्रो क्षेत्र के उद्यमी छोटी-छोटी पैकिंग में खाद्यान्न का स्टॉक घरेलू बाजार में उतारने थे जिससे ग्रामीण क्षेत्र में बहुत बड़े वर्ग को घर के आसपास ही रोजगार मिल जाता है।
लेकिन 5 प्रतिशत का जीएसटी लागू होने के बाद स्थिति बदल गई और पैकिंग का कार्य पड़े उद्यमियों द्वारा स्वचालित सॉर्टेक्स मशीनों के जरिए किया जाने लगा। इसके फलस्वरूप खाद्यान्न के खुदरा पैक के दाम में 35 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हो गई है।
सरकार इस मूल्य वृद्धि के लिए काला बाजारी एवं मुनाफाखोरी को जिम्मेवार मानती है जबकि वास्तविकता यह है कि जीएसटी के कारण खाद्यान्न का भाव ऊंचा हो रहा है।
सरकार से आग्रह है कि वह इस सच्चाई को यथाशक्ति स्वीकार करके गैर ब्रांडेड खाद्यान्न के खुदरा पैक पर लगे 5 प्रतिशत के जीएसटी को तत्काल प्रभाव से समाप्त करे। इससे कीमतों में कमी आना निश्चित हो जाएगा।
चावल का उदाहरण द्रष्टव्य है। यदि इसका उत्पादन ख़र्च 33 रुपए प्रति किलो मान लिया जाए तो इस बार 10 पैसे प्रति किलो का पैकिंग खर्च तथा 10 पैसे प्रति किलो का किराया भाड़ा जोड़कर दुकानों में यह 33.20 रुपए प्रति किलो की दर से पहुंचता था
और दुकानकार उस पर 50 पैसे प्रति किलो का मुनाफा लेकर उपभोक्ताओं / ग्राहकों को 33.70 रुपए प्रति किलो की दर से इसकी बिक्री करता था।
यह स्थिति जीएसटी लागू होने से पूर्व बनी हुई थी। लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद यह मूल्य बढ़कर 45-46 रुपए प्रति किलो हो गया है।
