सौंफ की बिजाई कम रहने के अनुमान
06-Dec-2024 07:04 PM
नई दिल्ली । चालू सीजन के दौरान देश में सौंफ की पैदावार अधिक होने के कारण सौंफ की कीमतें पूरे सीजन में सीमित दायरे में बनी रही। जिस कारण से उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाया।
परिणामस्वरूप आगामी सीजन के लिए उत्पादक राज्यों में सौंफ की बिजाई कम क्षेत्रफल पर किए जाने के समाचार मिल रहे हैं। सौंफ का मुख्यत उत्पादन गुजरात एवं राजस्थान में होता है। छिटपुट मात्रा में मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में भी होता है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 के लिए प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात में 1.23 लाख हेक्टेयर पर सौंफ की बिजाई की गई थी जबकि राजस्थान में बिजाई 58/59 हजार हेक्टेयर में हुई इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में बिजाई का क्षेत्रफल 13/14 हजार हेक्टेयर का रहा था।
जिस कारण से वर्ष 2024 के लिए उत्पादक राज्यों में सौंफ का कुल बिजाई क्षेत्रफल 1.95 लाख हेक्टेयर का रहा था जबकि वर्ष 2023 में कुल बिजाई 90/91 हजार हेक्टेयर में की गई थी। बिजाई का क्षेत्रफल बढ़ने एवं अनुकूल मौसम के कारण वर्ष 2024 में सौंफ की रिकॉर्ड पैदावार 38/39 लाख बोरी (प्रत्येक बोरी 55 किलो) की रही जबकि वर्ष 2023 में पैदावार 20/21 लाख बोरी की रही थी।
उल्लेखनीय है कि चालू सप्ताह के शुरू में गुजरात कृषि विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 2 दिसम्बर तक गुजरात में सौंफ की बिजाई 20040 हजार हेक्टेयर में की गई जबकि गत वर्ष इसी समयावधि में बिजाई का क्षेत्रफल लगभग 1 लाख हेक्टेयर का हो गया था। राजस्थान में भी इस वर्ष सौंफ की बिजाई घटने के समाचार मिल रहे हैं। नागौर, मेडता के व्यापारियों से हुई बातचीत के अनुसार इस वर्ष सौंफ की बिजाई गत वर्ष की तुलना में 50/60 प्रतिशत ही रहेगी।
निर्यात अधिक
भाव कम होने के कारण चालू सीजन के दौरान सौंफ का निर्यात अच्छा रहा। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-सितम्बर -2024 के दौरान सौंफ का निर्यात 53167.47 टन का रहा। और 493.25 करोड़ रुपए की आय हुई। जबकि गत वर्ष अप्रैल-सितम्बर - 2023 में सौंफ का निर्यात 22352.12 टन का हुआ। और 378.47 करोड़ रुपए की आय हुई।
धारणा तेजी की
जानकार सूत्रों का कहना है कि कमजोर बिजाई एवं बढ़ते निर्यात के कारण सौंफ की वर्तमान कीमतों में मंदे की संभावना नहीं है। वर्तमान में एवरेज क्वालिटी सौंफ का भाव 65/80 रुपए चल रहा है। जोकि आगामी दिनों में नई फसल आने से पूर्व 75/90 रुपए बनने के व्यापारिक अनुमान लगाए जा रहे हैं। नई फसल की आवक फरवरी-मार्च माह में होगी।
