समर्थन मूल्य में हुई वृद्धि से रबी फसलों का रकबा बढ़ने के आसार

06-Oct-2025 11:40 AM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार द्वारा 2025-26 के रबी सीजन हेतु छह प्रमुख फसलों- गेहूं, जौ, चना, मसूर सरसों एवं सैफ्लावर (कुसुम) के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 4 से 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है जिससे किसानों को इसका बिजाई क्षेत्र बढ़ाने का अच्छा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

पिछले साल सरसों एवं चना की बिजाई में कृषक समुदाय की दिलचस्पी कम नहीं थी मगर गेहूं का क्षेत्रफल बढ़ा था। इस बार खासकर सरसों की खेती के प्रति किसानों का आकर्षण बढ़ने के आसार हैं। क्योंकि इसका थोक मंडी भाव काफी ऊपर चल रहा है। 

पिछले साल की तुलना में इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6.6 प्रतिशत बढ़ाकर 2585 रुपए प्रति क्विंटल, जौ का 8.6 प्रतिशत बढ़ाकर 2150 रुपए प्रति क्विंटल, चावल का 4 प्रतिशत बढ़ाकर 5875 रुपए प्रति क्विंटल, मसूर का 4.5 प्रतिशत बढ़ाकर 7000 रुपए प्रति क्विंटल,

सरसों का 4.2 प्रतिशत बढ़ाकर 6200 रुपए प्रति क्विंटल तथा सैफ्लावर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 10.1 प्रतिशत बढ़ाकर 6540 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

हालांकि रबी सीजन में मूंग, उड़द तथा मूंगफली तथा धान आदि की भी खेती होती है मगर इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य खरीफ फसलों के साथ ही निर्धारित कर दिया जाता है।  मटर तथा अलसी के लिए समर्थन मूल्य की घोषणा नहीं होती है। 

उद्योग व्यापार क्षेत्र के विश्लेषकों का मानना है कि समर्थन मूल्य (एमएसपी) में हुई इस बढ़ोत्तरी से किसानों को रबी फसलों का बिजाई क्षेत्र बढ़ाने का प्रोत्साहन मिलेगा।

गेहूं की निश्चित सरकारी खरीद होती है और इसके एमएसपी में अच्छी वृद्धि हुई है इसलिए इसका रकबा बढ़ना निश्चित लगता है। सरसों का भाव मई के बाद से ही एमएसपी से काफी ऊपर चल रहा है जिससे किसानों को आकर्षक आमदनी प्राप्त हो रही है।

जौ का क्षेत्रफल या तो गत वर्ष के बराबर या कुछ ऊपर रहने की उम्मीद है। दलहन फसलों में चना और मसूर का रकबा कहीं बढ़ने और कहीं घटने की संभावना हैं।

यह देखना आवश्यक होगा कि रबी सीजन में मक्का की खेती के प्रति किसानों का कैसा रुख रहता है और इससे अन्य रबी फसलों के क्षेत्रफल पर कोई असर पड़ता है या नहीं। अन्य फसलों का रकबा सामान्य रहने के आसार हैं।