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समर्थन मूल्य में वृद्धि एवं ऊंचे भाव से सरसों का रकबा बढ़ने के आसार

23-Oct-2026 07:23 PM

समर्थन मूल्य में वृद्धि एवं ऊंचे भाव से सरसों का रकबा बढ़ने के आसार

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार द्वारा सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2025-26 सीजन के 6200 रुपए प्रति क्विंटल से 413 रुपए बढ़ाकर 2026-27 सीजन के लिए 6613 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। सरसों का थोक मंडी भाव पिछले अनेक महीनों से सरकारी समर्थन मूल्य से काफी ऊंचा चल रहा है जिससे किसानों को शानदार एवं लाभप्रद आमदनी प्राप्त हो रही है। सरसों की बिजाई आरंभ हो चुकी है। 

सरसों रबी सीजन की सबसे प्रमुख तिलहन फसल है और देश को खाद्य तेलों का सबसे ज्यादा प्राप्ति इसी तिलहन से होती है। इसके प्रमुख उत्पादक प्रांतों में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, गुजरात एवं बिहार आदि शामिल हैं।

इन राज्यों में मानसून की बारिश अपेक्षाकृत बेहतर हुई और वहां खेतों की मिटटी में नमी का अंश भी मौजूद है। कहने का आशय यह है कि सरसों के बिजाई क्षेत्र में वृद्धि के लिए तमाम परिस्थितियां लगभग अनुकूल बनी हुई है और किसान काफी उत्साहित हैं। सरसों का थोक मंडी भाव उछलकर नए-नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचता जा रहा है। एक दो मंडियों में तो यह 10,000 रुपए प्रति क्विंटल के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है। 

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार चालू रबी सीजन में भारतीय किसान गेहूं एवं मक्का का रकबा कुछ घटाकर सरसों और चना का क्षेत्रफल बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं। हालांकि शुरुआती चरण में सरसों  की बिजाई की गति गत वर्ष से कुछ धीमी देखी जा रही है लेकिन जल्दी ही इसकी रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है। सरकारी एजेंसियों (नैफेड / हैफेड) के पास सरसों का नगण्य स्टॉक बचा हुआ है और अगले मार्केटिंग सीजन में भी यदि भाव ऊंचा रहा तो उसे किसानों से इस महत्वपूर्ण तिलहन फसल की खरीद में कठिनाई हो सकती है।