सीमित स्टॉक एवं मजबूत मांग से गेहूं तथा इसके उत्पादों के दाम में उछाल
27-Jan-2025 05:12 PM
नई दिल्ली । रबी सीजन के सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न-गेहूं की बोआई समाप्त हो चुकी है और इसका कुल रकबा 320 लाख हेक्टेयर से कुछ आगे हो गया जो पिछले साल के बिजाई क्षेत्र तथा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल से ज्यादा है। अभी तक कुल मिलाकर फसल की हालत संतोषजनक है लेकिन वास्तविक उत्पादन फरवरी-मार्च में मौसम पर निर्भर करेगा।
आई ग्रेन इंडिया के डायरेक्टर राहुल चौहान का कहना है कि मौसम की हालत अनुकूल रहने तथा किसी प्राकृतिक आपदा का प्रकोप नहीं होने पर इस बार गेहूं का घरेलू उत्पादन बढ़कर 1100 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है।
घरेलू प्रभाग में गेहूं तथा इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों- आटा, मैदा एवं सूजी की कीमतों में भारी तेजी का माहौल बना हुआ है। मंडियों में गेहूं की सीमित आपूर्ति हो रही है जबकि मिलर्स- प्रोसेसर्स की मांग बहुत मजबूत बनी हुई है। उसके पास गेहूं का स्टॉक नहीं है।
इसी तरह बड़े-बड़े उत्पादकों, व्यापारियों एवं स्टॉकिस्टों के पास भी बहुत कम स्टॉक बचा हुआ है। केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न का सर्वाधिक योगदान देने वाले राज्य- पंजाब में तो गेहूं का भाव तेजी से उछलकर 4000 से 6000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है
जो सचमुच गंभीर चिंता की बात है। राष्ट्रीय स्तर पर भी गेहूं का खुदरा मूल्य 3350 रुपए प्रति क्विंटल (33.50 रुपए प्रति किलो) तथा आटा का भाव 38.50 रुपए प्रति किलो की ऊंचाई पर पहुंच गया है।
खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत भारतीय खाद्य निगम ने गेहूं की साप्ताहिक बिक्री का ऑफर बढ़ाकर 1.50 लाख टन निर्धारित किया है। अब तक इस योजना के अंतर्गत 8 लाख टन से अधिक गेहूं बेचा जा चुका है लेकिन खुले बाजार मूल्य पर इसका कोई असर नहीं देखा जा रहा है।
सरकार के पास सीमित स्टॉक है। राहुल चौहान का यह भी कहना है कि गेहूं के बाजार भाव को सामान्य स्तर पर लाने के लिए कम से कम दो लगातार सीजन में इसका रिकॉर्ड उत्पादन होना आवश्यक है।
