सीमित उतार-चढ़ाव के साथ लालमिर्च का भाव निकट भविष्य में स्थिर रहने की संभावना
10-Dec-2024 06:02 PM
गुंटूर । हालांकि लालमिर्च की खपत का महत्वपूर्ण सीजन धीरे-धीरे नजदीक आता जा रहा है जब एक तरफ जाड़े के दिनों में इसकी घरेलू मांग मजबूत होगी तो दूसरी ओर मुस्लिम बहुल देशों में रमजान की जोरदार मांग निकलेगी लेकिन निकट भविष्य में इसका कारोबार सुस्त तथा भाव सीमित उतार-चढ़ाव के साथ एक निश्चित सीमा में स्थिर रह सकता है।
आंध्र प्रदेश की गुंटूर मंडी में करीब 70-75 हजार बोरी लालमिर्च की औसत दैनिक आवक मिल रही है। उधर तेलंगाना की वारंगल मंडी में भी आवक कम हो रही है।
दरअसल कीमतों में नरमी या स्थिरता का माहौल होने से उत्पादकों एवं स्टॉकिस्टों को मंडियों में अपनी लालमिर्च का स्टॉक भारी मात्रा में उतारने का प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है।
फेंगल नामक समुद्री चक्रवाती तूफान एवं उत्तर-पूर्व मानसून की सक्रियता से तमिलनाडु एवं तटीय आंध्र प्रदेश तथा रायल सीमा में पिछले दिनों हुई भारी वर्षा से फसल को कुछ नुकसान होने की आशंका है।
कुछ अन्य क्षेत्रों में लालमिर्च की फसल पर ब्लैक थ्रिप्स कीट के प्रकोप की सूचना भी मिल रही है। लालमिर्च की नई फसल आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में अगले वर्ष की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च 2025) में जोर पकड़ेगी और उसी समय इसमें रमजान की जोरदार मांग भी निकलने की संभावना है।
उससे पूर्व बाजार में सीमित कारोबार होगा और कीमतों में थोड़ी-बहुत तेजी-मंदी देखी जा सकेगी। बांग्ला देश, चीन तथा मलेशिया सहित खाड़ी क्षेत्र के देशों में लालमिर्च के आयातक अगली नई फसल के आने का इंतजार करते हुए फिलहाल भारत से सीमित मात्रा में इसका आयात कर रहे हैं। मध्य दिसम्बर से मध्य फरवरी तक घरेलू मांग भी बढ़ सकती है।
