सोपा द्वारा कृषि मंत्री से सोयाबीन के लिए भावान्तर योजना शुरू करने का आग्रह
06-Sep-2025 05:35 PM
इंदौर। स्वदेशी वनस्पति तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण संगठन- सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने केन्द्रीय कृषि मंत्री ने 2025-26 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में सोयाबीन के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के बजाए भावान्तर भुगतान योजना आरंभ करने का आग्रह किया है।
सोपा के अध्यक्ष द्वारा केन्द्रीय कृषि मंत्री को भेजे एक पत्र में कहा गया है कि 2024-25 के मार्केटिंग सीजन हेतु सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 4892 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था मगर इसका थोक मंडी भाव उससे काफी नीचे रहने के कारण सरकारी एजेंसियों को लगभग 20 लाख टन सोयाबीन की खरीद एमएसपी पर करनी पड़ी।
इसके ऊपर प्रशासनिक खर्च, भंडारण एवं परिवहन खर्च, बर्बादी, नमी नुकसान तथा कमीशन आदि को जोड़ने पर वास्तविक लागत काफी अधिक हो गई।
अब नैफेड तथा एनसीसीएफ जैसी सरकारी एजेंसियों को लागत खर्च के मुकाबले करीब 10,000 रुपए प्रति टन की रियायत (छूट) के साथ सोयाबीन के अपने स्टॉक की बिक्री खुले बाजार में करनी पड़ रही है जिससे सरकार को तकरीबन 2000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।
सोपा के पत्र के अनुसार 2025-26 सीजन के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 5328 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है लेकिन मंडियों की हालत पहले जैसी ही रह सकती है।
सीमा शुल्क में कटौती के कारण सोया तेल तथा डीडीजीएस की तेजी से बढ़ती मांग की वजह से सोया डीओसी का भाव नरम चल रहा है। यदि यही स्थिति रही तो 2025-26 के सीजन में सरकार को 2024-25 सीजन के मुकाबले करीब दोगुनी मात्रा में एमएसपी पर किसानों से सोयाबीन खरीदने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है।
इससे सरकार का नुकसान बढ़कर 5000 करोड़ रुपए के आसपास पहुंच सकता है। इसे देखते हुए सरकार को सीधे मंडी खरीद के बजाए सोयाबीन के लिए भावान्तर भुगतान योजना लागू करना चाहिए।
इससे किसानों के बैंक खाते में बाजार भाव तथा एमएसपी के अंतर की राशि पहुंचेगी और उन्हें तुरंत राहत मिलेगी। दूसरी ओर सरकार का खर्च भी करीब 50 प्रतिशत घट जाएगा केवल वास्तविक किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए योजना तैयार की जानी चाहिए।
