सीपीओ तथा आरबीडी पामोलीन के बीच 15 प्रतिशत का शुल्ककांतर रखने का आग्रह

25-Apr-2025 08:47 PM

मुम्बई। स्वदेशी वनस्पति तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के एक संगठन- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) ने केन्द्र सरकार से स्वदेशी रिफाइनर्स को प्रतिस्पर्धा का समान धरातल उपलब्ध करवाने के लिए क्रूड पाम तेल (सीपीओ) तथा आरबीडी पामोलीन के बीच आयात शुल्क का अंतर कम से कम 15 प्रतिशत रखने का आग्रह किया है।

केन्द्रीय खाद्य मंत्री को भेजे एक पत्र में एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा है कि भारत में इंडोनेशिया एवं मलेशिया जैसे देशों से विशाल मात्रा में पाम तेल का आयात किया जाता है।

परम्परागत रूप से भारतीय रिफाइनर्स क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का आयात करते हैं और उसकी रिफाइनिंग करके आर बीडी पामोलीन तैयार करते हैं।

रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने के लिए विशाल पूंजी का निवेश किया गया है मगर विदेशों से सस्ते पामोलीन का भारी भरकम आयात होने से इन स्वदेशी रिफाइनर्स को आर्थिक दृष्टि से काफी नुकसान हो रहा है।

अक्सर रिफाइंड पामोलीन का आयात खर्च सीपीओ से नीचे रहता है जबकि सीपीओ को प्रोसेसिंग- रिफाइनिंग पर अलग से खर्च बैठता है। ऐसी हालत में घरेलू प्रभाग में ही आयातित पामोलीन की प्रतिस्पर्धी में टिकना स्वदेशी रिफाइनर्स के लिए कठिन होता है।

वर्तमान समय में सीपीओ तथा आरबीडी पामोलीन के बीच आयात शुल्क में केवल 7.5 प्रतिशत का अंतर है जो स्वदेशी रिफाइनर्स की दृष्टि से पर्याप्त नहीं है इसलिए इस अंतर को बढ़ाकर कम से 15 प्रतिशत किया जाना चाहिए। 

चालू मार्केटिंग सीजन के शुरुआती पांच महीनों में यानी नवम्बर 2024 से मार्च 2025 के दौरान देश में 6.63 लाख टन रिफाइंड पामोलीन का आयात हुआ जो कुल पाम तेल आयात का 27 प्रतिशत रहा।

इस अवधि में कुल मिलाकर 24.16 लाख टन पाम तेल मंगाया गया जिसमें सीपीओ की भागीदारी 17.24 लाख टन या 72 प्रतिशत तथा क्रूड पाम कर्नेल तेल की हिस्सेदारी 29 हजार टन या करीब 1 प्रतिशत रही। 2023-24 के समूचे मार्केटिंग सीजन में 79.31 लाख टन पामोलीन मंगाया गया था।