साप्ताहिक समीक्षा- चीनी
26-Apr-2025 07:34 PM
मांग एवं आपूर्ति के अनुरूप चीनी के दाम में मिश्रित रुख
नई दिल्ली। देश के अधिकांश राज्यों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है जिससे चीनी की औद्योगिक मांग एवं खपत में बढ़ोत्तरी हो रही है लेकिन घरेलू मांग अपेक्षाकृत कम है। चीनी का फ्री सेल कोटा घरेलू मांग को पूरा करके के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। अगले सप्ताह मई माह के लिए फ्रीसेल कोटा घोषित होगा। 19 से 25 अप्रैल वाले सप्ताह के दौरान आमतौर पर चीनी का मिल डिलीवरी भाव कुछ ऊंचा रहा लेकिन हाजिर बाजार मूल्य में स्थिरता या नरमी देखी गई। महाराष्ट्र में टेंडर मूल्य कुछ नीचे आया जबकि कर्नाटक में थोड़ा सुधर गया। दोनों राज्यों में गन्ना की क्रशिंग एवं चीनी के उत्पादन का सीजन लगभग समाप्त हो चुका है।
मिल डिलीवरी भाव
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान चीनी का मिल डिलीवरी भाव बिहार में 70 रुपए प्रति क्विंटल, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 45 रुपए, पंजाब में 40 रुपए तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10 रुपए प्रति क्विंटल तेज रहा जबकि मध्य प्रदेश में 30 रुपए तथा गुजरात में 25-35 रुपए प्रति क्विंटल नरम पड़ गया। सभी क्षेत्रों में चीनी का दमा ऊंचे स्तर पर चल रहा है जिससे इसका निर्यात प्रदर्शन कमजोर देखा जा रहा है।
हाजिर भाव
चीनी का हाजिर बाजार मूल्य दिल्ली में 20 रुपए सुधरकर 4300/4400 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा मगर इंदौर में 4160/4260 रुपए प्रति क्विंटल तथा रायपुर में 4160/4250 रुपए प्रति क्विंटल के पुराने स्तर पर स्थिर रहा। कोलकाता में 40 रुपए तथा मुम्बई (वाशी) में 20 रुपए की गिरावट रही। वहां नाका पोर्ट डिलीवरी मूल्य भी 20 रुपए नरम पड़कर 3900/4100 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया।
टेंडर
चीनी का टेंडर मूल्य महाराष्ट्र में 3755/3875 रुपए प्रति क्विंटल और कर्नाटक में 3880/3980 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में चीनी मिलें या तो बंद हो चुकी हैं या शीघ्र ही बंद होने वाली है। पिछले सीजन की तुलना में इस बार चीनी के घरेलू उत्पादन स्टॉक काफी घट जाएगा। इससे कीमतों में ज्यादा नरमी आना मुश्किल होगा।
कोटा
मासिक फ्री सेल कोटा आने पर चीनी बाजार के आगामी परिदृश्य का अनुमान लगाना संभव हो सकेगा। पिछले साल आम चुनाव के कारण मई के फ्रीसेल कोटा काफी बढ़ा दिया गया था। मई-जून में भयंकर गर्मी पड़ती है जिससे कोल्ड ड्रिंक्स एवं आइसक्रीम आदि के निर्माण में चीनी की खपत बढ़ेगी। गुड़ का दबाव घट रहा है। चीनी का कुल निर्यात 10 लाख टन के नियत कोटे के मुकाबले 6-7 लाख टन तक ही अटकने का अनुमान लगाया जा रहा है।
