साप्ताहिक समीक्षा- चीनी
12-Jul-2025 07:36 PM
कमजोर कारोबार से चीनी में सीमित उतार-चढ़ाव
नई दिल्ली। नया कोटा प्रभावी होने, पिछला बकाया स्टॉक मौजूद रहने, खरीदारों की मांग कमजोर पड़ने तथा मानसून की सक्रियता बढ़ने से 5-11 जुलाई वाले सप्ताह के दौरान घरेलू प्रभाग में चीनी के मिल डिलीवरी मूल्य तथा हाजिर बाजार भाव में या तो स्थिरता रही या सीमित उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया।
बारिश
अनेक राज्यों में वर्षा का दौर जारी रहने तथा तापमान में गिरावट आने से कोल्ड ड्रिंक्स एवं आइसक्रीम निर्माण उद्योग में चीनी की मांग घट गई है। जून में भी ऐसा ही हुआ था जिसे देखते हुए सरकार ने जुलाई माह के लिए चीनी का फ्री सेल कोटा घटाकर 2.2 लाख टन निर्धारित कर दिया है। अभी कोई त्यौहारी या लग्नसरा की मांग भी नहीं है।
मिल डिलीवरी भाव
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान चीनी के मिल डिलीवरी मूल्य में पूर्वी उत्तर प्रदेश में 35 रुपए तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 20 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा हुआ और मध्य प्रदेश में भी यह 5 रुपए सुधर गया मगर पंजाब में 20 रुपए एवं बिहार में 15 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई। गुजरात में भाव स्थिर बना रहा।
हाजिर भाव
चीनी का हाजिर बाजार भाव दिल्ली में 80 रुपए लुढ़ककर 4080/4280 रुपए प्रति क्विंटल तथा रायचूर (छत्तीसगढ़) में 25 रुपए गिरकर 4100/4200 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया जबकि इंदौर में 4100-4200 रुपए प्रति क्विंटल के पिछले स्तर पर बरकरार रहा। मुम्बई (वाशी) मार्केट में यह 10 रुपए की नरमी के साथ 3880/4080 रुपए प्रति क्विंटल पर अटक गया जबकि कोलकाता में 4250/4350 रुपए प्रति क्विंटल के पिछले स्तर पर कायम रहा। चीनी का नका पोर्ट डिलीवरी मूल्य 10 रुपए गिरकर 3830/4030 रुपए प्रति क्विंटल रह गया।
टेंडर
महाराष्ट्र में चीनी के टेंडर मूल्य में 25-35 रुपए प्रति क्विंटल का सुधार देखा गया जबकि कर्नाटक में 20-40 रुपए प्रति क्विंटल का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया।
निर्यात
चीनी का निर्यात प्रदर्शन कमजोर है और घरेलू बाजार में भी मांग सुस्त देखी जा रही है जिससे कीमतों में भारी तेजी का माहौल नहीं बन रहा है। 2023-24 सीजन के मुकाबले 2024-25 सीजन के दौरान चीनी का घरेलू उत्पादन 17-18 प्रतिशत घटकर 260-261 लाख टन पर सिमट जाने का अनुमान है लेकिन फिर भी बाजार काफी हद तक शांत बना हुआ है। जुलाई के शेष दिनों में भी इसमें ज्यादा तेजी आने में संदेह है।
गन्ना
गन्ना का क्षेत्रफल इस बार पिछले साल से कुछ बढ़ सकता है और मानसून तथा मौसम की हालत अनुकूल रही तो इसकी अच्छी पैदावार हो सकती है। इससे चीनी का बेहतर उत्पादन होने की उम्मीद है। कुछ संगठनों ने 2025-26 के मार्केटिंग सीजन में चीनी का सकल उत्पादन बढ़कर 350 लाख टन तक पहुंच जाने का अनुमान लगाया है लेकिन इसके लिए गन्ना प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में अच्छी बारिश होना आवश्यक है।
