साप्ताहिक समीक्षा- सोयाबीन
26-Apr-2025 07:39 PM
मिलर्स की कमजोर मांग से सोयाबीन का भाव नरम
नई दिल्ली। सरकारी एजेंसी- नैफेड के स्टॉक की बिक्री स्थगित रहने के बावजूद मिलर्स / प्रोसेसर्स की मांग कमजोर रहने से 19-25 अप्रैल वाले सप्ताह के दौरान तीनों शीर्ष उत्पादक राज्यों- मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं राजस्थान में सोयाबीन के प्लांट डिलीवरी मूल्य में 50 से 150 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई। पिछले कुछ सप्ताहों से कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल देखा जा रहा था और महाराष्ट्र में भाव 4600-4700 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था मगर अब घटकर कुछ नीचे आ गया है।
स्टॉक
किसानों एवं व्यापारियों के पास अभी सोयाबीन का अच्छा खासा स्टॉक मौजूद है और विभिन्न मंडियों में इसकी सामान्य आवक हो रही है। जून से सोयाबीन की बिजाई शुरू होने वाली है। सरकारी एजेंसी के पास इस महत्वपूर्ण तिलहन का रिकॉर्ड स्टॉक पड़ा हुआ है।
बिक्री
नैफेड अपने विशाल स्टॉक को बेचने के लिए तैयार है मगर उद्योग संगठनों के आग्रह को देखते हुए उसे कृषि मंत्रालय की ओर से हरी झंडी नहीं मिल रही है। प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में सोयाबीन की औसत दैनिक आवक 1.70-2.30 लाख बोरी के बीच हो रही है और कभी इसकी अच्छी खरीद होती है तो कभी मांग कुछ कमजोर पड़ जाती है। सोया तेल एवं सोयामील की मांग तथा कीमत में होने वाला बदलाव भी सोयाबीन बाजार को प्रभावित करता है।
सोया रिफाइंड
सोयाबीन के प्लांट डिलीवरी मूल्य में नरमी आने के बावजूद सोया रिफाइंड तेल का भाव या तो स्थिर रहा या इसमें मामूली उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। महाराष्ट्र में इसके दाम में 10-15 रुपए प्रति 10 किलो का इजाफा दर्ज किया गया। कोटा एवं मुम्बई में भाव स्थिर रहे जबकि कांडला में यह 15 रुपए सुधरकर 1255 रुपए प्रति 10 किलो पर पहुंचा मगर हल्दिया में 5 रुपए गिरकर 1260 रुपए रह गया।
सोया डीओसी
सोयाबीन की कीमतों में नरमी रहने से सोया डीओसी का भाव कमजोर पड़ गया। इसकी घरेलू एवं निर्यात मांग भी सप्ताह के दौरान मजबूत नहीं रही जिससे इसके दाम में 500 से 1500 रुपए प्रति टन तक की गिरावट दर्ज की गई। मध्य प्रदेश के एक प्लांट में तो सोया डीओसी का भाव 3600 रुपए लुढ़ककर 31900 रुपए प्रति टन पर आ गया। ब्राजील में सोयाबीन फसल की कटाई-तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है जबकि अर्जेन्टीना में यह जोर पकड़ने लगी है। पाम तेल के भाव प्रमुख निर्यातक देशों में घटने से अब सोया तेल का आयात खर्च ऊंचा बैठने की संभावना है जिससे घरेलू बाजार भाव में कुछ मजबूती आ सकती है।
