साप्ताहिक समीक्षा-सोयाबीन

03-May-2025 07:47 PM

क्रशिंग इकाइयों की कमजोर मांग से सोयाबीन का भाव नरम 

नई दिल्ली। पिछले कुछ सप्ताहों से सोयाबीन का प्लांट डिलीवरी भाव स्थिर या मजबूत बना हुआ था मगर 26 अप्रैल से 2 मई वाले सप्ताह के दौरान क्रशिंग- प्रोसेसिंग इकाइयों की मांग कमजोर पड़ने से कीमतों में नरमी आ गई। सोया तेल एवं सोया मील में कारोबार सुस्त होने से मिलर्स को सोयाबीन की खरीद ऊंचे दाम पर करने का प्रोत्साहन नहीं मिल सका। 
प्लांट  
मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र में सोयाबीन के प्लांट डिलीवरी मूल्य में 50 से 100 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई जबकि राजस्थान में भाव काफी हद तक स्थिर बना रहा। सोयाबीन का प्लांट डिलीवरी भाव अब भी 4892 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी नीचे चल रहा है। 
सोया तेल (रिफाइंड) 
सोयाबीन में नरमी के असर से सोया रिफाइंड तेल का दाम भी 10 से 30 रुपए प्रति 10 किलो तक घट गया। मंदसौर की एक इकाई में यह 30 रुपए घटकर 1220 रुपए प्रति 10 किलो पर आ गया। उज्जैन में भी 28 रुपए की गिरावट रही / महाराष्ट्र के धुलिया, हिंगोली एवं लातूर में सोया रिफाइंड तेल के दाम में 20 से 30 रुपए नागपुर में 30-35 रुपए तथा नांदेड में 25-30 रुपए प्रति 10 किलो की गिरावट रही। कोटा तथा कांडला में भाव 35-35 रुपए घटकर क्रमश: 1255 रुपए एवं 1225 रुपए प्रति 10 किलो, हल्दिया में 20 रुपए गिरकर 1235/1240 रुपए तथा मुम्बई में 10 रुपए फिसलकर 1250 रुपए प्रति 10 किलो पर आ गया।
बिजाई 
अगले महीने से सोयाबीन की बिजाई शुरू होने वाली है और किसानों को खेती का साधन जुटाने के लिए पैसो की आवश्यकता है। सरकारी खरीद पहले ही समाप्त हो चुकी है इसलिए उत्पादकों को प्रचलित बाजार भाव पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा। 
स्टॉक 
सरकारी एजेंसी - नैफेड के पास रिकॉर्ड मात्रा में सोयाबीन का स्टॉक मौजूद है जिसकी खरीद 2024-25 के खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई थी। यह एजेंसी अपने स्टॉक को बाजार में उतारने के लिए बेचैन है मगर सरकार उसे उसकी अनुमति नहीं दे रही है। समझा जाता है कि अगले महीने (जून) के अंत से सोयाबीन के सरकारी स्टॉक की बिक्री आरंभ हो सकती है। 
सोया डीओसी 
सोया डीओसी में कारोबार अत्यन्त सुस्त होने से सप्ताह के दौरान उसकी कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। कुछ इकाइयों में तो यह 2000-3500 रुपए प्रति टन तक घट गयी। निर्यात के लिए ज्यादा पूछ-परख नहीं देखी गई जबकि घरेलू मांग भी कमजोर रही। मिलर्स- प्रोसेसर्स को ज्यादा पड़ता नहीं बैठ रहा है। अप्रैल में विदेशों से क्रूड डीगम सोयाबीन तेल के आयात में कुछ बढ़ोत्तरी होने की संभावना है।