साप्ताहिक समीक्षा- धान- चावल

29-Aug-2026 08:26 PM

चुनिंदा मंडियों में धान की सीमित आवक- चावल का भाव कुछ मजबूत 

नई दिल्ली। धान की आपूर्ति का लीन या ऑफ सीजन चल रहा है। खरीफ कालीन धान की रोपाई हो रही है और इसका क्षेत्रफल गत वर्ष से पीछे है। नया धान अक्टूबर से आना शुरू होगा। उत्तर प्रदेश की कुछ मंडियों में सितम्बर से बासमती  धान की आवक अक्सर आरंभ हो जाती है। 
दिल्ली 
फिलहाल दिल्ली की नरेला मंडी, छत्तीसगढ़ की भाटापाड़ा एवं राजिम मंडी तथा राजस्थान की कोटा एवं बूंदी मंडी में सीमित मात्रा में धान की नियमित आपूर्ति हो रही है। इसके अलावा पंजाब के अमृतसर एवं तरन तारन तथा हरियाणा के तरावड़ी में भी कभी कभार बासमती धान की आवक हो जाती है। उत्तर प्रदेश की मंडियां सुनसान पड़ने लगी हैं।
आवक 
22-28 अगस्त वाले सप्ताह के दौरान नरेला मंडी में धान की सीमित आवक के साथ कमजोर मांग के कारण 1509 धान का भाव 115 रुपए घटकर 3600/4000 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। भाटापाड़ा में रोजाना 3500 बोरी तथा राजिम में 2500 से 7000 बोरी के बीच धान की आवक हुई और सामान्य उठाव के साथ भाव लगभग स्थिर बना रहा। कोटा एवं बूंदी मंडी में भी धान की कीमतों में विशेष उतार-चढ़ावा नहीं देखा गया। 
चावल 
जहां तक चावल का सवाल है तो अधिकांश केन्द्रों में इसका भाव स्थिर रहा। दिल्ली के नया बाजार तथा पंजाब के अमृतसर में कुछ किस्मों एवं श्रेणियों के चावल की कीमतों में 100-200 रुपए प्रति क्विंटल का सुधार आया जबकि अन्य किस्मों के चावल के दाम में स्थिरता बनी रही। 
निर्यात 
वास्तविकता तो यह है कि समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान धान-चावल के बाजार में सक्रियता या चहल-पहल का अभाव देखा गया। होर्मुज स्ट्रेट के जल मार्ग से व्यावसायिक जहाजों के आवागमन में अनिश्चितता का माहौल बरकरार रहने से बासमती चावल के निर्यात पर असर पड़ रहा है। 
प्रतिबंध 
अमरीका द्वारा ईरान पर नए सिरे से आर्थिक प्रतिबंध लगाने और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के माध्यम से भुगतान का रास्ता अवरुद्ध होने से भारतीय बासमती चावल निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।