साप्ताहिक समीक्षा- धान-चावल

14-Jun-2025 08:33 PM

चावल का निर्यात मूल्य घटने से धान की कीमतों पर दबाव 

नई दिल्ली। आपूर्ति का ऑफ सीजन होने के प्रमुख मंडियों में बहुत कम मात्रा में धान आ रहा है और इसमें बासमती का भाव बहुत ज्यादा रहता है। वैश्विक बाजार में चावल का भाव नरम पड़ गया है जिससे मिलर्स- प्रोसेसर्स एवं निर्यातकों को ऊंचे दाम पर धान खरीदने का प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। 
आवक 
7 से 13 जून वाले सप्ताह केदौरान दिल्ली की नरेला मंडी में 4-6 हजार बोरी, छत्तीसगढ़ की भाटापाड़ा मंडी में 7-8 हजार बोरी तथा राजिम मंडी में 8-9 हजार बोरी धान की दैनिक आवक हुई लेकिन मांग कमजोर होने से कीमतों में या तो स्थिरता या 25-50 रुपए की नरमी दर्ज की गई। 
उत्तर प्रदेश 
उत्तर प्रदेश के कुछ मंडियों में बासमती धान की थोड़ी-बहुत आवक हो रही है लेकिन खरीदारों की सक्रियता बहुत कम होने से कीमत 50-100 रुपए प्रति क्विंटल नीचे चल रही है। राजस्थान के कोटा एवं बूंदी में 5-10 हजार बोरी धान की दैनिक आवक के बीच कीमतों में 100-200 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई। 
चावल 
जहां तक चावल का सवाल है तो इसकी निर्यात मांग भी जोर नहीं पकड़ पाई है। सामान्य श्रेणी के चावल का कारोबार सुस्त पड़ गया है क्योंकि प्रमुख आयातक देशों में इसका अच्छा खासा स्टॉक मौजूद है। 
बासमती चावल 
बासमती चावल के निर्यात ऑफर मूल्य में भारी गिरावट आने से निर्यात की मात्रा तो बढ़ी है लेकिन उसके अनुरूप निर्यात आमदनी में बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। भाटापाड़ा में चावल का भाव नरम रहा और अमृतसर में 1718 सेला चावल का दाम 250 रुपए प्रति क्विंटल तथा 1509 सेला का भाव 100 रुपए प्रति क्विंटल नीचे आया। 
उत्तराखंड 
उत्तराखंड की मगर मंडी में चावल का कारोबार कुछ बेहतर हुआ जिससे अधिकांश किस्मों एवं श्रेणियों के चावल की कीमतों में 100 से 300 रुपए प्रति क्विंटल तक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। राजस्थान की बूंदी मंडी में सुगंधा एवं 1509 चावल का भाव 300-300 रुपए घटकर क्रमश: 5600/5650 रुपए प्रति क्विंटल एवं 6150/6200 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। 1718 सेला चावल का मूल्य 400 रुपए लुढ़ककर 6650/6700 रुपए प्रति क्विंटल पर अटक गया। 
दिल्ली 
दिल्ली के नया बाजार में ताज सेला चावल का भाव 100 रुपए सुधरकर 5000/5200 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा जबकि अन्य अधिकांश किस्मों एवं श्रेणियों के चावल की कीमतों में स्थिरता बनी रही। मार्च 2025 के बाद से ही गैर बासमती चावल का निर्यात प्रदर्शन कमजोर चल रहा है और कीमतों में भी नरमी देखी जा रही है। बासमती चावल के निर्यातकों ने दाम घटाकर मात्रा बढ़ाने का प्रयास किया। अब इजरायल के साथ भयंकर लड़ाई शुरू होने के कारण ईरान में भारतीय बासमती चावल का निर्यात अस्थायी तौर पर प्रभावित होने की आशंका है।