साप्ताहिक समीक्षा-धान-चावल
31-Aug-2024 06:36 PM
बासमती धान की कीमतों में नरमी जारी - चावल में उतार-चढ़ाव
नई दिल्ली। खरीफ कालीन धान का उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 400 लाख हेक्टेयर के करीब पहुंच गया है जबकि कुछ क्षेत्रों में इसकी रोपाई जारी है। नई फसल की कटाई-तैयारी अक्टूबर से आरंभ होगी। इस बीच उत्तर प्रदेश में 1509 बासमती धान की अगैती खेती वाली फसल की कटाई-तैयारी हो रही है मगर इसका थोक मंडी भाव नीचे चल रहा है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
दिल्ली
22 से 28 अगस्त वाले सप्ताह के दौरान दिल्ली की नरेला मंडी में 1509 हैण्ड धान का दाम 68 रुपए सुधरकर 2200/2700 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा जबकि 1509 कम्बाइन का भाव 2100/2564 रुपए पर स्थिर रहा। छत्तीसग़ढ की भाटापाड़ा मंडी में एचएमटी धान का भाव 100 रुपए सुधर गया मगर श्रीराम धान का दाम 100 रुपए नरम पड़ गया। नरेला तथा भाटापाड़ा में धान की सीमित आवक हो रही है। अधिकांश प्रमुख मंडियों में धान की आपूर्ति बंद है। जिन मंडियों में थोड़ी-बहुत आवक हो रही है वहां भी इसक भाव नरम देखा जा रहा है। व्यापारिक, मिलर्स एवं निर्यातक इसकी खरीद में बहुत कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
राजस्थान
राजस्थान की बूंदी मंडी में 1509 एवं 1718 नंबर के धान की कीमतों में 100-100 रुपए का सुधार आया लेकिन कोटा मंडी में भारी गिरावट दर्ज की गई। वहां सुगंधा का भाव 150 रुपए, 1509 का 400 रुपए, 1718 का भी 400 रुपए तथा पूसा बासमती धान का दाम 500 रुपए प्रति क्विंटल नीचे लुढ़क गया। कारोबारियों के अनुसार इन किस्मों के धान की लिवाली बहुत कम हो रही है।
चावल
जहां तक चावल का सवाल है तो भाटापाड़ा, रायचूर तथा अमृतसर जैसी महत्वपूर्ण मंडियों में इसके दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ जबकि राजिम मंडी में 25 रुपए की नरमी रही। बूंदी में सुगंधा चावल का भाव 250 रुपए तथा 1509 का दाम 100 रुपए तेज रहा।
हरियाणा
लेकिन हरियाणा की बेंचमार्क करनाल मंडी में कुछ किस्मों के चावल की कीमतों में 100-200 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई। आरएस 10 सेला चावल का दाम तो 350 रुपए प्रति क्विंटल घट गया। दिल्ली के नया बाजार में भी सुस्त कारोबार के बीच सभी किस्मों के चावल का दाम पुराने स्तर पर स्थिर रहा।
निर्यात
चावल निर्यातकों को लगता है कि केन्द्र सरकार बासमती चावल के न्यूनतम निर्यात मूल्य को 950 डॉलर प्रति टन के वर्तमान स्तर से घटाकर 800-850 डॉलर प्रति टन नियत कर सकती है और सफेद गैर बासमती चावल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा सकती है। यदि ऐसा हुआ तो धान-चावल के कारोबार की गति काफी तेज हो सकती है। वैश्विक बाजार में भारतीय चावल की अच्छी मांग बनी हुई है।
