साप्ताहिक समीक्षा- धान-चावल

11-Apr-2026 08:12 PM

सामान्य कारोबार के साथ धान चावल के दाम मिश्रित रुख 

नई दिल्ली। खरीफ कालीन धान और खासकर बासमती की आपूर्ति प्रमुख उत्पादक मंडियों में क्रमिक रूप से घटती जा रही है जबकि गैर बासमती धान की आवक नगण्य हो रही है। रबी कालीन धान की नई फसल की कटाई-तैयारी लगभग शुरू हो चुकी है मगर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं राजस्थान जैसे- प्रांतों में इसकी खेती नहीं होती है। इन राज्यों की मंडियों में धान बहुत कम आ रहा है। 
दिल्ली 
4-10 अप्रैल वाले सप्ताह के दौरान दिल्ली की नरेला मंडी में 5-7 हजार बोरी की औसत दैनिक आवक के साथ धान के दाम में कुछ सुधार दर्ज किया गया। ईरान-अमरीका के बीच सीजफायर (युद्ध विराम) की घोषणा से बाजार को कुछ बल मिला है।
युद्ध विराम  
भारत से खाड़ी क्षेत्र, पश्चिम एशिया एवं मध्य-पूर्व के देशों में बासमती चावल का सर्वाधिक निर्यात होता है। अगर ईरान-अमरीका के बीच युद्ध समाप्त होता है और स्थायी शांति पर सहमति बन जाती है तो भारत से बासमती चावल के निर्यात की गति तेज हो जाएगी और तब बासमती धान का थोक मंडी भाव भी सुधरने की उम्मीद रहेगी। लेकिन यदि शांति वार्ता सकल नहीं हुई तो मामला फिर से गड़बड़ हो सकता है।
उत्तर प्रदेश 
उत्तर प्रदेश की शाहजहांपुर धान का भाव लगभग स्थिर रहा लेकिन अलीगढ़ में 1509 हैण्ड का दाम 350 रुपए बढ़कर बढ़कर 4300 रुपए प्रति क्विंटल तथा 1718 का मूल्य 400 रुपए उछलकर 4500 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। राजस्थान की बूंदी एवं कोटा मंडी में अच्छी आवक एवं बेहतर खरीदारी के कारण विभिन्न किस्मों के धान की कीमतों में 200-300 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई। 
चावल 
जहां तक चावल का सवाल है तो अमृतसर में व्यापारियों एवं निर्यातकों की जोरदार लिवाली से 1121 सेला सहित अन्य किस्मों के दाम में 250 से 400 रुपए प्रति क्विंटल तक की तेजी दर्ज की गई। बूंदी मंडी में भी भाव 400 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ गया। दिल्ली के नया बाजार में चावल का मूल्य तेज रहा और कारोबार अच्छा हुआ।