सरकारी चावल की अधिकता से एथनॉल निर्माण में मक्का का इस्तेमाल घटा
13-Nov-2025 03:16 PM
नई दिल्ली। हालांकि हाल के वर्षों में भारत में एथनॉल के उत्पादन में मक्का के इस्तेमाल में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है जिससे इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज की कीमतों में भी तेजी- मजबूती का माहौल बना रहा लेकिन अब इसके उपयोग में कमी आने के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि एथनॉल निर्माताओं (डिस्टीलर्स) को सस्ते या रियायती मूल्य पर सरकारी चावल का भारी-भरकम स्टॉक प्राप्त हो रहा है।
ग्रेन एथनॉल मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (गेमा) के अध्यक्ष का कहना है कि एथनॉल निर्माण में उपयोग बढ़ने से मक्का के घरेलू उत्पादन संवर्धन को प्रोत्साहन मिला और किसानों को अच्छी आमदनी प्राप्त हुई।
दूसरी ओर सरकार ने भी अपने चावल का भंडार का दरवाजा एथनॉल निर्माताओं के लिए खोल दिया जिससे एथनॉल निर्माण में मक्का पर निर्भरता में कमी आ रही है और सरकार को चावल का अपना अधिशेष स्टॉक घटाने में सहायता मिल रही है।
पहले भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने एथनॉल निर्माताओं को अपने स्टॉक से चावल की आपूर्ति कुछ महीनों के लिए स्थगित कर दी थी और तब उद्योग को मक्का सहित अन्य अनाजों का उपयोग बढ़ाना पड़ा था।
इससे मक्का के दाम में भारी वृद्धि हो गई। लेकिन जब सरकारी चावल की पर्याप्त आपूर्ति दोबारा आरंभ हुई तब मक्का का उपयोग घटने लगा।
'गेपा' के अध्यक्ष का कहना है कि यद्यपि एफसीआई के चावल से निर्मित एथनॉल के लिए मार्जिन काफी कम है क्योंकि इसका परिवहन एवं प्रोसेसिंग खर्च ऊंचा बैठता है लेकिन फिर भी चावल के बढ़ते उपयोग के कारण मक्का के दाम में तेजी पर ब्रेक लग गया है।
दरअसल एथनॉल डिस्टीलरीज को खाद्य निगम के चावल की निश्चित आपूर्ति हो रही है और सरकार ने इसके कोटे का आवंटन पहले ही कर दिया है इसलिए इसकी खरीद में डिस्टीलर्स की अच्छी दिलचस्पी बनी हुई है।
दूसरी ओर उसे मक्का खरीदने के लिए बाजार पर निर्भर रहना पड़ता है जहां कीमतों में उतार-चढ़ाव आता रहता है। सरकारी चावल एक निश्चित मूल्य पर प्राप्त हो जाता है।
एक समस्या यह है कि खाद्य निगम के चावल से एथनॉल निर्माण के लिए 60-65 दिनों की क्रियाशील पूंजी की जरूरत पड़ती है जबकि बाजार में मक्का की खरीद के वास्ते 25 दिनों की ही आवश्यकता होती है।
