सरकारी गेहूं की जोरदार खरीद
14-Dec-2024 11:49 AM
खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत भारतीय खाद्य निगम द्वारा अपने स्टॉक से गेहूं की बिक्री के लिए साप्ताहिक ई-नीलामी आयोजित की जा रही है और इसकी खरीद में मिलर्स-प्रोसेसर्स जबरदस्त दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
आलम यह है कि अभी तक दो बार 1-1 लाख टन गेहूं की बिक्री के लिए साप्ताहिक नीलामी आयोजित की गई और दोनों बार लगभग 100 प्रतिशत ऑफर की खरीद हो गई।
4 दिसम्बर को आयोजित पहली नीलामी में एक लाख टन के कुल ऑफर में से 98,700 टन तथा 11 दिसम्बर को आयोजित दूसरी नीलामी में एक लाख टन के कुल ऑफर में से 99,815 टन गेहूं की बिक्री हो गई। पहली नीलामी में 1501 प्रोसेसर्स ने गेहूं खरीदा जबकि दूसरी नीलामी में खरीदारों की संख्या 1480 रही।
दिलचस्प तथ्य यह है कि देश के 10 शीर्ष खपतकर्ता राज्यों में मिलर्स- प्रोसेसर्स गेहूं के शत-प्रतिशत ऑफर की खरीद कर रहे हैं जिसमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, आसाम तथा पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
इन प्रांतों के लिए 70 हजार टन से अधिक गेहूं का ऑफर दिया गया था जबकि दूसरी नीलामी में वहां 70,500 टन की खरीद की गई।
देश के दक्षिणी राज्यों में भी सरकारी गेहूं की खरीद के प्रति मिलर्स / प्रोसेसर्स में जबरदस्त उत्साह एवं आकर्षण देखा जा रहा है। केवल पूर्वोत्तर क्षेत्र के एक-दो प्रांतों में गेहूं की खरीद कुछ कम हो रही है।
मिलर्स-प्रोसेसर्स लम्बे समय से सरकारी गेहूं की प्रतीक्षा कर रहे थे। खाद्य मंत्रालय ने जुलाई में ही ओएमएसएस चालू करने की घोषणा की थी और गेहूं का न्यूनतम आरक्षित मूल्य भी निर्धारित कर दिया था। लेकिन बाद में इसे कुछ महीनों तक के लिए स्थगित कर दिया गया क्योंकि केन्द्रीय पूल में इस खाद्यान्न का सीमित अधिशेष स्टॉक मौजूद है।
अब मार्च 2025 तक के लिए ओएमएसएस के तहत 25 लाख टन गेहूं बेचने का निर्णय लिया गया है और प्रत्येक सप्ताह एक लाख टन की बिक्री का ऑफर दिया जा रहा है।
सरकारी गेहूं अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर उपलब्ध हो रहा है इसलिए मिलर्स-प्रोसेसर्स इसकी भारी खरीद कर रहे हैं। दरअसल खाद्य उत्पाद का निर्माण एवं व्यवसाय करने वाली कंपनियों (प्रोसेसर्स) को गेहूं के ऊंचे दाम के कारण काफी कठिनाई हो रही थी
और अपने उत्पादों का भाव बढ़ाना पड़ रहा था। अब उन्हें कीमतों को स्थिर रखने में सहायता मिलेगी। इससे आम लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
