सरकार को चना के बिजाई में गिरावट आने की आशंका
04-Dec-2025 10:37 AM
नई दिल्ली। हालांकि देश के लगभग सभी प्रमुख चना उत्पादक राज्यों में खेतों की मिटटी में नमी का पर्याप्त अंश मौजूद है और मौसम की हालत भी अनुकूल बनी हुई है लेकिन उसके बावजूद सरकार को इस सर्वाधिक महत्वपूर्ण दलहन के बिजाई क्षेत्र में कुछ कमी आने की आशंका है।
सरकार की इस आशंका का कारण यह है कि परम्परागत रूप से जब भी खेतों की मिटटी में नमी का अधिक अंश मौजूद रहा है तब किसानों ने गेहूं की बिजाई को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी है। इस बार भी स्थिति वैसी ही है।
वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार गेहूं, चना एवं सरसों सहित सभी रबी फसलों की बिजाई पर गहरी नजर रखी जा रही है।
अभी तक चना का रकबा गत वर्ष से आगे चल रहा है परन्तु उसके मुकाबले गेहूं की बिजाइ में ज्यादा तेज गति से बढ़ोत्तरी हो रही है।
आगामी सप्ताहों में चना की बिजाई की रफ्तार धीमी पड़ने तथा गेहूं की बोआई में अच्छी प्रगति होने की संभावना है। वैसे चना के क्षेत्रफल में जोरदार गिरावट आने की आशंका नहीं है क्योंकि इसके न्यूनतम समर्थन मूल्य में अच्छी वृद्धि हुई है और सरकार इसकी खरीद के लिए भी तैयार है।
पिछले दो वर्षों से चना उत्पादकों को अपने दलहन का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। इसे देखते हुए प्रतीत होता है कि चना का कुल रकबा गत वर्ष के आसपास पहुंच सकता है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि चना का घरेलू उत्पादन 2021-22 के सीजन में तेजी से उछलकर 135.40 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंचा था लेकिन उसके बाद से उत्पादन में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया।
इसका कारण बिजाई क्षेत्र में कमी आना तथा मौसम की स्थिति प्रतिकूल रहना माना जा रहा है। चना का उत्पादन घटकर 2022-23 के सीजन में 122.70 लाख टन, 2023-24 के सीजन में 110.40 लाख टन रह गया।
2024-25 सीजन के लिए सरकार ने 113.40 लाख टन चना के उत्पादन का अनुमान लगाया है जो उससे पिछले सीजन के उत्पादन से कुछ ज्यादा है।
