सरकार की प्राथमिकता सूची में चीनी का निर्यात तीसरे नम्बर पर

13-Aug-2025 06:13 PM

नई दिल्ली। हालांकि चालू वर्ष के दौरान गन्ना के बिजाई क्षेत्र में इजाफा होने तथा मौसम एवं वर्षा की हालत अनुकूल रहने से इस महत्वपूर्ण औद्योगिक फसल की पैदावार बढ़ने के आसार हैं जिससे चीनी का उत्पादन खासकर महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में बेहतर होने की उम्मीद है लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि चीनी का निर्यात उसकी प्राथमिकता सूची में तीसरे नम्बर पर है।

सरकार की पहली प्राथमिकता घरेलू प्रभाग में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता सुनिश्चित करना और बाजार भाव को एक निश्चित सीमा में स्थिर रखना है ताकि आम उपभोक्ताओं को कोई कठिनाई न हो।

दूसरी प्राथमिकता एथनॉल निर्माण के लिए चीनी का समुचित कोटा आवंटित करने की है जिससे पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण का ऊंचा लक्ष्य हासिल करने में सफलता प्राप्त हो सके।

इसके बाद यदि उद्योग के पास ज्यादा अधिशेष स्टॉक बचता है तो उस चीनी के निर्यात की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है। इसमें यह ध्यान भी रखा जाएगा कि 2025-26 के मार्केटिंग सीजन के अंत में उद्योग के पास चीनी का इतना स्टॉक अवश्य मौजूद रहे जिससे 2026-27 सीजन के आरंभिक ढाई-तीन माह की घरेलू जरूरत को आसानी से पूरा किया जा सके। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि राष्ट्रीय स्तर पर गन्ना का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 55.68 लाख हेक्टेयर से 1.63 लाख हेक्टेयर बढ़कर इस बार 57.31 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया

जो सामान्य औसत क्षेत्रफल 52.51 लाख हेक्टेयर से काफी अधिक है। हालांकि उत्तर प्रदेश में गन्ना का रकबा गत वर्ष से पीछे चल रहा है मगर महाराष्ट्र और कर्नाटक में क्षेत्रफल तेजी से बढ़ा है। 2024-25 के सीजन में इन दोनों प्रांतों में चीनी के उत्पादन में जोरदार गिरावट आ गई थी। उत्तर प्रदेश में भी चीनी का उत्पादन कम हुआ था। इस बार घरेलू उत्पादन 18 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। 

केन्द्र सरकार एथनॉल निर्माण के लिए 2025-26 के मार्केटिंग सीजन के दौरान चीनी मिलों एवं डिस्टीलरीज को 40-50 लाख टन तक चीनी के उपयोग की अनुमति देने पर विचार कर सकती है।

यदि ऐसा हुआ तो निर्यात उद्देश्य के लिए चीनी का विशेष स्टॉक बचने में संदेह रहेगा। वैसे भी भारतीय चीनी का भाव अंतर्राष्ट्रीय बाजार मूल्य से ऊंचा रहने के कारण इसका निर्यात प्रभावित हो रहा है।

2024-25 के मार्केटिंग सीजन हेतु सरकार ने 100 लाख टन चीनी का निर्यात कोटा आवंटित किया मगर इसकी पूरी मात्रा का शिपमेंट होने में संदेह है। मिलर्स को देश के अंदर ही चीनी का आकर्षक मूल्य प्राप्त हो रहा है।