सरकार से नारियल एवं कोपरा के आयात की अनुमति देने का आग्रह

10-Jul-2025 06:16 PM

कोच्चि। घरेलू उत्पादन में गिरावट आने तथा औद्योगिक मांग मजबूत रहने से नारियल एवं कोपरा के दाम में जबरदस्त बढ़ोत्तरी हुई है और अब भी बाजार अत्यन्त ऊंचे स्तर पर बरकरार है।

इसे देखते हुए केन्द्रीय ऑयल मर्चेंट्स एसोसिएशन (कोमा) ने केन्द्र सरकार से नारियल तथा कोपरा के आयात की अनुमति देने और इस पर लगे वैधानिक- बाधाओं को समाप्त करने का आग्रह किया है। 

प्रधानमंत्री एवं केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री को प्रेषित एक पत्र में कोमा ने कहा है कि उत्पादन में गिरावट आने की वजह से नारियल एवं कोपरा का अभाव महसूस हो रहा है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं होने से इसके कारोबार पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

कीमतों में भी बेतहाशा वृद्धि हुई है। इसे ध्यान में रखकर सरकार को इंडोनेशिया एवं फिलीपींस जैसे देशों से नारियल- कोपरा के आयात पर लगाए गए नियमों - नियंत्रणों को हटा लेना चाहिए। इन देशों में उत्पाद अत्यन्त सस्ते दाम पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। इस आयात के बाद ही मिलिंग के लिए कोपरा के अभाव का संकट दूर हो सकता है। 

कोमा के अध्यक्ष ने केन्द्र सरकार से कुछ समय के लिए देश से नारियल, कोपरा तथा नारियल तेल का निर्यात रोकने का आग्रह भी किया है ताकि केरल के नारियल तेल उद्योग का अस्तित्व बचाने में सहायता मिल सके।

कोपरा तथा नारियल तेल की भारी कमी से तेल मिलों का कार्य संचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है जिससे एक लाख से अधिक लोगों के रोजगार पर खतरा उत्पन्न हो गया है। 

माल का जबरदस्त अभाव होने से कोपरा का दाम उछलकर 257 रुपए प्रति किलो तथा नारियल तेल का भाव उछलकर 387 रुपए प्रति लीटर की ऊंचाई पर पहुंच गया है।

यदि सरकार ने शीघ्र ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो नारियल तेल का मूल्य बढ़कर 400 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच सकता है। इस अप्रत्याशित मूल्य वृद्धि से केरल के आम लोगों को भारी कठिनाई हो रही है क्योंकि वहां नारियल तेल का उपयोग खाद्य तेल के रूप में किया गया है। ऐसा करने वाला वह अकेला राज्य है। 

एसोसिएशन ने देश में नारियल का उत्पादन बढ़ाने के लिए भी सरकार से आवश्यक एहतियाती कदम उठाने का आग्रह किया है। केरल में वर्षों से नारियल का कोई नया बागान नहीं लगाया गया है जबकि पुराने बागानों के पेड़ों की उत्पादकता घट गई है। श्रमिक का खर्च भी ऊंचा है।