सरकारी उपायों से गेहूं बाजार का समीकरण प्रभावित होने की संभावना
08-Jan-2026 08:46 PM
नई दिल्ली। रबी सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न- गेहूं का बिजाई क्षेत्र बढ़ाने में इसकी भारतीय किसानों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। इसके साथ-साथ ऐसी उन्नत एवं विकसित क्वालिटी के बीज का ज्यादा इस्तेमाल किया गया है जिसमें प्रतिकूल मौसम को सहने की अधिक क्षमता मौजूद है।
आमतौर पर मौसम की हालत फसल के लिए अनुकूल बनी हुई है लेकिन कुछ इलाकों में बारिश की आवश्यकता महसूस की जा रही है। अगर जनवरी में वहां वर्षा होती है तो गेहूं की फसल को काफी राहत मिल सकती है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय को 2025-26 के मौजूदा रबी सीजन में गेहूं का घरेलू उत्पादन तेजी से बढ़कर सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच जाने का भरोसा है।
इससे खाद्य मंत्रालय ने अपनी रणनीति बनाने के लिए विवश होना पड़ रहा है। यदि उत्पादन बढ़ेगा तो केन्द्रीय पूल के लिए इसकी सरकारी खरीद भी बढ़ेगी और तब उसके सुरक्षित भंडारण का संकट उत्पन्न हो सकता है।
इसे देखते हुए खाद्य विभाग ने खुले बाजार बिक्री योजना को दोबारा सक्रिय करना का फैसला किया है। खाद्य निगम को 31 मार्च 2026 तक अपने स्टॉक से कुल 30 लाख टन गेहूं बेचने की अनुमति दी गई है मगर अभी तक इसके केवल 10 प्रतिशत भाग की ही बिक्री संभव हो सकी है।
गेहूं का थोक मंडी भाव काफी हद तक स्थिर बना हुआ है। खाद्य निगम को अपने गेहूं की बिक्री बढ़ाने के लिए इसके न्यूनतम आरक्षित मूल्य (रिजर्व प्राइज) को घटाना होगा।
इसके अलावा गेहूं पर लागू भंडारण सीमा (स्टॉक लिमिट) के आदेश को भी वापस लिया जाना आवश्यक है। जिस पर सरकार को सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
खुले बाजार बिक्री योजना के तहत गेहूं का आरक्षित मूल्य 2550 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है जबकि उस पर किराया भाड़ा अलग से लगेगा। इसके फलस्वरूप अनेक राज्यों के मिलर्स प्रोसेसर्स सरकारी गेहूं की खरीद में बहुत कम दिलचस्पी दिखा रहे थे।
