सरसों मंडी मासिक रिपोर्ट – अप्रैल 2025
29-Apr-2025 01:08 PM
सरसों मंडी मासिक रिपोर्ट – अप्रैल 2025
कीमतों में नरमी, आवक में भारी गिरावट
★ अप्रैल 2025 में देशभर की प्रमुख सरसों मंडियों में कीमतों में अस्थिरता और कुल आवक में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। महीने की शुरुआत में जहां आवक तेज़ थी, वहीं अंत तक इसमें लगभग आधी कमी आ गई।
दिल्ली मंडी (42% कंडीशन)
★ महीने की शुरुआत में सरसों की कीमत रुपए 6150/क्विंटल रही, जो 10 अप्रैल को रुपए 6300 तक पहुंची। इसके बाद निरंतर गिरावट के साथ 21 अप्रैल को रुपए 6000 और अंत में 29 अप्रैल तक रुपए 6050 पर आकर रुकी। कुल मिलाकर, दिल्ली मंडी में महीनेभर में कीमतें स्थिर से थोड़ी नरम रहीं।
जयपुर मंडी (42% कंडीशन)
★ जयपुर में शुरुआत में रुपए 6375/क्विंटल की दर थी, जो 3 अप्रैल को रुपए 6350 और फिर 10 अप्रैल को रुपए 6400 तक पहुंची। लेकिन 25 अप्रैल को यह रुपए 6250 तक गिर गई। बाद में मामूली सुधार के साथ रुपए 6275 पर स्थिर हुई। जयपुर में सरसों की कीमतें पूरे महीने ऊँच-नीच के बीच घूमती रहीं।
भरतपुर (औसत गुणवत्ता)
★ यहां कीमतों में महीने के अंत तक नरमी रही। अप्रैल की शुरुआत रुपए 6100 से हुई लेकिन धीरे-धीरे घटते हुए 18 अप्रैल को रुपए 5875 तक पहुंच गई। अंत में रुपए 5910 तक सुधरी, परंतु यह अभी भी शुरुआती स्तर से कम है।
अलवर (औसत गुणवत्ता)
★ कीमतों में बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव नहीं दिखा। महीनेभर औसतन रुपए 6000–रुपए 6100 के दायरे में कारोबार हुआ। 24 अप्रैल को एक दिन रुपए 6050 तक बढ़ा लेकिन फिर से रुपए 5900 तक लौट आया।
★ सभी मंडियों में भाव MSP 5,950 रुपए/ क्विंटल के आसपास या मामूली कम चल रहे है।
देशभर की कुल आवक:
★ 1 अप्रैल को सरसों की अखिल भारतीय आवक लगभग 11.5 लाख बैग थी, जो घटते-घटते 29 अप्रैल को 5.25 लाख बैग तक पहुंच गई — यानी लगभग 55% की गिरावट। आवक में यह गिरावट किसानों की बिक्री में कमी और मंडियों में सुस्त गतिविधि का संकेत देती है और साथ ही सकरी कांटे पर सरसों का अधिक तुलना माना जा रहा है।
★ अप्रैल 2025 में कुल आवक 184 लाख बोरी पहुंची जो मार्च में 241 लाख बोरी थी।
★ आवक में तेज गिरावट आने के बावजूद कीमतों में बढ़त न आने से संकेत मिलते हैं कि सरसों की क्रशिंग डिमांड बेहद कमज़ोर चल रही है।
★ पशु चारे में DDGS का इस्तेमाल बढ़ने से खाल की डिमांड में काफी कमी आई।
★ DDGS से छुटकारा मिलना मुश्किल, यह आगे चल कर बाज़ारों में और हावी हो सकता हैं।
★ शुक्र मनाएं कि अन्य तेलों की तरह सरसों तेल का आयात नहीं किया जाता और सरसों तेल की डिमांड साल दर साल बढ़ ही रही है।
★ त्यौहारी सीजन से पहले यानि जुलाई से सरसों तेल की डिमांड निकालनी शुरू होगी ऐसे में कीमतों को मिल सकता है मामूली सपोर्ट।
