सीसीआई द्वारा अपने स्टॉक से कपास की बिक्री शुरू

06-Mar-2025 04:06 PM

मुम्बई। केन्द्रीय एजेंसी- भारतीय कपास निगम द्वारा 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में देश भर के किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी गई कपास के विशाल स्टॉक की बिक्री आरंभ कर दी गई है लेकिन टेक्सटाइल मिलें फिलहाल केवल अच्छी क्वालिटी के उत्पादन की खरीद में ही दिलचस्पी दिखा रही है।

5 मार्च से सरकारी रूई की बिक्री आरंभ हुई लेकिन इसका आधार मूल्य (बेस प्राइस) थोक मंडियों में प्रचलित कीमतों से ऊंचा होने के कारण मिलर्स एवं व्यापारी इसकी खरीद में कम सक्रियता दिखा रहे हैं। 

प्राप्त सूचना के अनुसार सीसीआई (भारतीय कपास निगम) की रूई का न्यूनतम आधार मूल्य 54000/55000 रुपए प्रति कैंडी (356 किलो) नियत हुआ है जबकि बाजार में रूई का औसत भाव 52500/54000 रुपए प्रति कैंडी के बीच चल रहा है।

निगम द्वारा 5 मार्च को नए एवं पुराने माल को मिलाकर कुल 6,02,300 गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) रूई की बिक्री का ऑफर दिया गया लेकिन इसमें से केवल 6800 गांठ की खरीद मिलर्स द्वारा की गई जबकि व्यापारियों ने सिर्फ 300 गांठ की खरीद की। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान निगम द्वारा अब तक 94 लाख गांठ से अधिक कपास की खरीद की जा चुकी है जबकि खरीद की प्रक्रिया लगभग सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में अभी जारी है।

केन्द्र सरकार ने चालू मार्केटिंग सीजन के लिए कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य मीडियम रेशे वाली श्रेणी के लिए 7121 रुपए प्रति क्विंटल तथा लम्बे रेशे वाली किस्मों के लिए 7521 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जबकि थोक मंडी भाव इससे कुछ नीचे चल रहा है।

प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक निगम द्वारा इस बार तेलंगाना में सर्वाधिक 40 लाख गांठ से ज्यादा कपास की खरीद की जा चुकी है जबकि महाराष्ट्र में लगभग 28 लाख गांठ और गुजरात में 11 लाख गांठ कपास  खरीदी गई।

वर्तमान समय में कपास का सबसे ज्यादा स्टॉक सीसीआई के पास ही उपलब्ध है। 2024-25 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन के दौरान अभी तक राष्ट्रीय स्तर की मंडियों में कुल मिलाकर 219 लाख गांठ से अधिक कपास की आवक हो चुकी है।

शीर्ष व्यापारिक संस्था- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने चालू सीजन में 301.75 लाख गांठ कपास के घरेलू उत्पादन की संभावना व्यक्त की है जो केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के प्रथम अग्रिम उत्पादन अनुमान से कुछ अधिक है।

उद्योग समीक्षकों के अनुसार वर्तमान मूल्य स्तर पर निगम को अपनी कपास के स्टॉक की बिक्री के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ सकता है।