सिंधु जल समझौता स्थगित होने से पाकिस्तान की बढ़ेगी मुसीबत
24-Apr-2025 03:21 PM
नई दिल्ली। पहलगांव आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने कई अहम निर्णय लिए हैं जिसमें सिंधु नदी-जल समझौता को स्थगित करना भी शामिल है।
भारत सरकार के इस निर्णय से पाकिस्तान कम से कम चार तरीको से प्रभावित होगा दक्षिण-मानसून के महत्वपूर्ण सीजन के दौरान वहां कृषि उत्पादन पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार संधि को स्थगित रखने का निर्णय 'मास्टर स्टोक' (करारा प्रहार) साबित हो सकता है क्योंकि सिंधु नदी के बांधों-जलाशयों में भंडार क्षमता के मुकाबले 30 प्रतिशत से भी कम पानी बचा हुआ है।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रान्त में स्थित तारबेला डैम में केवल 30 प्रतिशत पानी का स्टॉक है। एक माह पूर्व इस बांध में न्यूनतम भंडारण स्तर से केवल 9 फीट ज्यादा पानी मौजूद था।
मंगला डैम में भी जल स्तर काफी नीचे है। वहां नहरों को सूखने से बचाने के लिए कम से कम 4 फीट का जल स्तर होना चाहिए। पाकिस्तान के इस भाग में मानसून की वर्षा जून के अंतिम सप्ताह में ही शुरू होने की संभावना है। ऐसे समय में यदि सिंधु नदी में पानी का प्रवाह अवरुद्ध हुआ तो पाकिस्तान की कठिनाई बहुत बढ़ जाएगी।
हिमालय पर्वत पर ग्लेशियर (हिम नदी) के पिघलने की प्रक्रिया 15 मई के आसपास शुरू होती है। मोटे अनुमान के अनुसार ग्लेशियर के पानी तथा बारिश के पानी के बीच भारत में जलाशयों के भंडारण वितरण का अनुमान 59 प्रतिशत एवं 41 प्रतिशत रहता है।
भारत अपने जलाशयों में कम से कम सितम्बर तक पानी को रोक सकता है और पाकिस्तान के लिए पानी रिलीज नहीं कर सकता है। इससे पाकिस्तान में खासकर कपास और धान की खेती को भारी धक्का लग सकता है जो उसकी दो मुख्य फसलें हैं।
पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में कपास की बिजाई 15 अप्रैल से आरंभ हो जाती है। बीज में अंकुरण एवं फसल की प्रगति के लिए पानी की सख्त जरूरत पड़ेगी। पानी नहीं मिला तो फसल का बर्बाद होना निश्चित है।
पाकिस्तान में पहले ही कपास का वार्षिक उत्पादन घटकर 70 लाख गांठ के आसपास सिमट चुका है। धान का उत्पादन तो उससे भी ज्यादा प्रभावित होने की आशंका है।
धान के बिचड़े (नवजात पौधे) की बिजाई पंजाब और सिंध प्रान्त में मध्य मई से आरंभ होती है और उसे भी पानी के अभाव का संकट झेलना पड़ सकता है।
