सोयाबीन की बिजाई में भारी गिरावट आने से तिलहनों का रकबा घटा
30-Sep-2025 04:54 PM
नई दिल्ली। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि यद्यपि पिछले साल की तुलना में इस वर्ष अरंडी के बिजाई क्षेत्र में 77 हजार हेक्टेयर तथा नाइजर सीड उत्पादन क्षेत्र में 4 हजार हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी हुई है और सूरजमुखी का रकबा लगभग बराबर रहा है
मगर तिल का बिजाई क्षेत्र 57 हजार हेक्टेयर और सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 9.10 लाख हेक्टेयर घटने से खरीफ कालीन तिलहन फसलों के कुल क्षेत्रफल में 10.51 लाख हेक्टेयर की भारी गिरावट आ गई है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार पिछले साल के मुकाबले चालू खरीफ सीजन के दौरान 26 सितम्बर 2025 तक राष्ट्रीय स्तर पर तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 200.52 लाख हेक्टेयर से घटकर 190.01 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।
बिजाई पहले ही समाप्त हो चुकी है। गत वर्ष की तुलना में इस बार मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 49.96 लाख हेक्टेयर से घटकर 48.31 लाख हेक्टेयर, तिल का बिजाई क्षेत्र 11.07 लाख हेक्टेयर से गिरकर 10.50 लाख हेक्टेयर, सूरजमुखी का रकबा 73 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 70 हजार हेक्टेयर तथा सोयाबीन का क्षेत्रफल 129.55 से लुढ़ककर 120.45 लाख हेक्टेयर पर अटक गया
जबकि नाइजर सीड का बिजाई क्षेत्र 98 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 1.02 लाख हेक्टेयर और अरंडी का उत्पादन क्षेत्र 8.17 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.94 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। तिलहन फसलों को प्राकृतिक आपदाओं से कुछ नुकसान भी हुआ है।
हालांकि मूंगफली का बिजाई क्षेत्र दोनों शीर्ष उत्पादक प्रांतों- गुजरात एवं राजस्थान में बढ़ा है और वहां फसल की हालत काफी अच्छी बताई जा रही है जिससे वहां उत्पादन में बढ़ोत्तरी होने के आसार हैं लेकिन अन्य उत्पादन प्रांतों में इसका रकबा घट गया है।
दूसरी ओर सोयाबीन के उत्पादन क्षेत्र में तीन प्रमुख उत्पादक राज्यों- मध्य प्रदेश महाराष्ट्र एवं राजस्थान में गिरावट आई है और बाढ़-वर्षा से फसल को क्षति भी पहुंची है। इसके फलस्वरूप उत्पादन में गिरावट आने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
सोयाबीन और मूंगफली की नई फसल की कटाई-तैयारी तथा मंडियों में आपूर्ति आरंभ हो चुकी है और इसका भाव सरकारी समर्थन मूल्य से काफी नीचे चल रहा है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा गुजरात एवं उत्तर प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंगफली खरीदने के प्रस्ताव को पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है जबकि मध्य प्रदेश सरकार ने सोयाबीन के लिए राज्य में भावान्तर भुगतान योजना लागू करने का निर्णय लिया है। इससे किसान ज्यादा खुश नहीं हैं।
