सोयाबीन सर्वे रिपोर्ट: सोपा
13-Aug-2025 05:16 PM
सोयाबीन सर्वे रिपोर्ट: सोपा
★ सोपा ने 4 अगस्त 2025 से 9 अगस्त 2025 के बीच खरीफ 2025 की सोयाबीन फसल का पहला व्यापक क्षेत्र और स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया।
★ दो टीमों ने तीन राज्यों के 38 जिलों में लगभग 4,200 किलोमीटर की यात्रा करते हुए 89 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वेक्षण किया। इसमें मध्य प्रदेश में 22 जिलों में 46.6 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 11 जिलों में 34.9 लाख हेक्टेयर और राजस्थान में 5 जिलों में 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र शामिल था।
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★ सर्वेक्षण में पाया गया कि इस वर्ष सोयाबीन की बुवाई का क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में 3.110 लाख हेक्टेयर यानी 2.63 प्रतिशत कम है। इसका मुख्य कारण किसानों का अन्य फसलों की ओर रुझान और बुवाई के दौरान लगातार हुई बारिश से बुवाई न होना है। लगभग 70 प्रतिशत फसल फूल आने के चरण में है और कुल मिलाकर फसल की स्थिति सामान्य है। अधिकतर खेत खरपतवार और प्रमुख कीटों से मुक्त हैं। कुछ क्षेत्रों में स्टेम फ्लाई का प्रकोप देखा गया, ★ जिसे कीटनाशक के प्रयोग से नियंत्रित कर लिया गया। अलग-अलग जगहों पर देर से बुवाई, जलभराव और खरपतवार का दबाव देखा गया।
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महाराष्ट्र
★ जलना, बुलढाणा, बीड, लातूर, हिंगोली, नांदेड़ और परभणी जिलों में फसल स्वस्थ और विकास सामान्य है। वाशीम, अकोला, हिंगोली और अमरावती के कुछ हिस्सों में बुवाई में देरी या पुनः बुवाई और पौध की ऊँचाई कम पाई गई।
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मध्य प्रदेश
★ मालवा क्षेत्र में लगभग 70 प्रतिशत फसल फूल आने के चरण में है और स्थिति सामान्य है। अशोकनगर, गुना, हरदा, बैतूल, खंडवा और खरगोन जिलों में पिछले वर्ष की तुलना में बुवाई का क्षेत्र घटा है।
★ हरदा जिले में लगातार बारिश के कारण 20 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई नहीं हो सकी, पौध की वृद्धि कमजोर रही और भारी खरपतवार पाए गए। अशोकनगर, गुना, सागर और विदिशा के निचले इलाकों में जलभराव, पौध की धीमी वृद्धि और खरपतवार की समस्या पाई गई।
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राजस्थान
★ प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ और बारां जिलों में फसल की स्थिति औसत है और 70 प्रतिशत क्षेत्र फूल आने के चरण में है।
★ झालावाड़ जिले में लगातार बारिश से 20 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई नहीं हो पाई। कोटा और झालावाड़ जिलों में जलभराव के कारण पौध की वृद्धि कमजोर रही, पौधे छोटे रह गए और खरपतवार की समस्या हुई।
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सम्पूर्ण भारत
★ कुल मिलाकर, सोयाबीन फसल की स्थिति संतोषजनक है, विशेषकर महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में। हालांकि, अधिक बारिश के कारण कुछ क्षेत्रों में बुवाई नहीं हो पाई, विकास में देरी हुई और जलभराव की समस्या देखी गई। आने वाले चरणों में फसल की निरंतर निगरानी और समय पर प्रबंधन जरूरी है।
