शुल्क मुक्त होने के कारण हो रहा है दलहनों का रिकॉर्ड आयात

19-Mar-2025 07:21 PM

मुम्बई। अरहर (तुवर), उड़द एवं मसूर का शुल्क मुक्त आयात तो पहले से हो रहा था जबकि सरकार ने दिसम्बर 2023 में पीली मटर तथा मई 2024 में देसी चना के आयात को भी शुल्क मुक्त कर दिया।

इसके फलस्वरूप विदेशों से इसके आयात का प्रवाह अत्यन्त तेजी से बढ़ गया। अब तुवर एवं उड़द के शुल्क मुक्त आयात की अवधि एक साल और बढ़ा दी गई है जिससे 31 मार्च 2026 तक इसका निर्बाध आयात सुनिश्चित हो गया है।

पीली मटर के आयात की समय सीमा भी 31 मई 2025 तक बढ़ा दी गई है। मसूर के आयात पर 10 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाया गया है जबकि चना पर फैसला होना अभी बाकी है। 

केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है की चालू वित्त वर्ष के आरंभिक 11 महीनों में दलहनों के आयात पर होने वाला खर्च उछलकर 5.03 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।

यह पहला अवसर है जब दलहनों का आयात खर्च 5 अरब डॉलर से ऊपर पहुंचा है। तुवर एवं देसी चना का आयात बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जबकि अन्य दलहनों का भी भारी आयात किया गया। 

एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एन्ड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के चेयरमैन ने दलहनों का आयात खर्च बढ़कर सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने के पीछे सरकार की शुल्क मुक्त आयात नीति को मुख्य कारण माना है।

अत्यन्त विशाल मात्रा में आयात होने से घरेलू प्रभाग में विभिन्न दलहनों की आपूर्ति एवं उपलब्धता काफी बढ़ गई और कीमत घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास या उससे नीचे आ गई।

पीली मटर के एक विशाल भाग के आयात की आवश्यकता नहीं थी और सरकार पहले ही कम मात्रा में इसके आयात के सहारे कीमतों को नियंत्रित कर सकती थी।

अक्टूबर 2024 के बाद भारतीय बाजार में आयातित पीली मटर का विशाल भंडार जमा हो गया जबकि इसकी बिल्कुल भी जरूरत नहीं थी। 

शुल्क मुक्त सस्ते दलहनों के विशाल आयात का नकारात्मक असर भारतीय किसानों पर पड़ने लगा है और सरकार की नीति से केवल विदेशी दलहन उत्पादकों एवं निर्यातकों को फायदा हो रहा है।

सरकार को दलहनों की आयात नीति पर गम्भीरतापूर्वक नए सिरे से विचार करना चाहिए क्योंकि इस नीति के कारण न केवल देश से बहुमूल्य विदेशी मुद्रा काफी मात्रा में बाहर जा रही है बल्कि आत्मनिर्भरता के विजन को भी आघात लग रहा है।