शीतकालीन बारिश के अभाव से रबी फसलों के लिए खतरा बढ़ने की आशंका

06-Dec-2024 01:56 PM

नई दिल्ली । चालू वर्ष के दौरान रबी फसलों को ऊंचे तापमान एवं सामान्य औसत से कम बारिश की गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जिससे इसकी प्रगति में बाधा पड़ चुकी है।

ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसोर्स इकोनॉमिक्स एंड साइंसेज (अबारेस) ने कहा है कि दिसम्बर 2024 से फरवरी 2025 के दौरान शीतकाल में भारत के अधिकांश इलाकों में मौसम एवं वर्षा की हालत रबी फसलों के पूरी तरह अनुकूल नहीं रहेगा। 

अबारेस की एक रिपोर्ट के अनुसार दिसम्बर-फरवरी के बीच वैश्विक मौसम परिदृश्य के अवलोकन से मिश्रित रुख का संकेत मिलता है। दुनिया के प्रमुख खाद्यान्न और तिलहन उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की हालत कहीं अच्छी तो कहीं कमजोर रह सकती है।

इसके तहत भारत, ब्राजील, पश्चिम एशिया, पूर्वी चीन, दक्षिणी अमरीका के अधिकांश भाग तथा मैक्सिको में सामान्य औसत से कम या बहुत कम वर्षा होने का अनुमान लगाया गया है।

इधर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अपनी रिपोर्ट में देश के अधिकांश भाग में दिसम्बर 2024 से फरवरी 2025 के दौरान तापमान सामान्य औसत से ऊंचा रहने का अनुमान व्यक्त किया है जबकि दूसरी ओर जाड़े के दिनों में शीत लहर इस बार कम समय तक रहेगी और इसकी तीव्रता भी सामान्य औसत से नीचे रहेगी।

मौसम विभाग के मुताबिक दिसम्बर 2024 के दौरान देश के दक्षिणी राज्यों, पश्चिम-मध्यवर्ती भाग, पूर्वी-मध्यवर्ती क्षेत्र तथा पूर्वोत्तर प्रांतों में सामान्य स्तर से अधिक बारिश हो सकती है जबकि उत्तरी एवं पश्चिमोत्तर भारत के अधिकांश इलाकों में बारिश सामान्य औसत से कम होगी।

मालूम हो कि यह क्षेत्र रबी फसलों और खासकर गेहूं, सरसों, चना, मसूर एवं जौ का प्रमुख उत्पादक इलाका माना जाता है। देश के पूर्वी तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में भी सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। 

पिछले सप्ताह ऑस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो ने कहा था कि हिन्द महासागर में डायपोल बनने के अच्छे चांस है मगर वह चालू माह के अंत तक न्यूट्रल (उदासीन) हो सकता है। इससे भारत में बारिश की संभावना घट जाएगी।

उत्तर-पूर्व मानसून का समय भी अक्टूबर से दिसम्बर के बीच ही रहता है। रबी फसलों को खासकर फरवरी-मार्च के दौरान कम तापमान एवं नियमित अंतराल पर बारिश की आवश्यकता पड़ती है मगर घना कोहरा, भीषण ठंड, धुंध तथा हिमपात (बर्फबारी) इसके लिए नुकसान दायक साबित होता है।