तेलंगाना में भारी वर्षा से खरीफ फसलों को क्षति

23-Aug-2025 12:02 PM

निजामाबाद। पिछले दो सप्ताहों के दौरान मानसून की सक्रियता बढ़ने से तेलंगाना के कई जिलों में भारी वर्षा हुई जिससे निचले इलाकों में खेतों में पानी भर गया। इसके फलस्वरूप कम से कम 15 हजार एकड़ क्षेत्र में खरीफ फसलों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिल रही है।

भारी वर्षा एवं खेतों में जल जमाव से राज्य के आदिलाबाद, निजामाबाद, करीमनगर, वारंगल, नालगोंडा एवं सांगारेड्डी जैसे जिलों में धान, कपास एवं मक्का आदि खरीफ फसलों को नुकसान होने की खबर है। मेडक जिले में भी फसलों को क्षति हुई है। 

आरंभिक आंकलन के अनुसार राज्य में 10-15 हजार एकड़ क्षेत्र में फसलें बर्बाद हुई हैं। जबकि आधिकारिक तौर पर इसका आंकलन होना अभी बाकी है। आदिलाबाद जिले के प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को जल्दी से जल्दी सर्वेक्षण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया है।

मेडक जिले में करीब 4000 एकड़ क्षेत्र में धान एवं कपास के साथ-साथ ज्वार, मूंग तथा उड़द की फसल क्षतिग्रस्त हुई है। जबकि किसानों का दावा है कि वास्तविक क्षति उससे दोगुने क्षेत्रफल में हुई है।

इसी तरह सांगारेड्डी जिले में 400 एकड़, सिद्दीपेट में 3553 एकड़, निजामाबाद में 500 एकड़ कामारेड्डी में 3500 एकड़ तथा आदिलाबाद जिले में सर्वाधिक 5500 एकड़ क्षेत्र में फसलों के बर्बाद होने का आरंभिक अनुमान है। 

उल्लेखनीय है कि खरीफ सीजन के दौरान तेलंगाना में धान एवं कपास का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है जबकि मक्का, तुवर, उड़द, मूंग एवं सोयाबीन आदि की खेती भी होती है।

राज्य में पहले मानसूनी बारिश का काफी अभाव बना हुआ था और जुलाई के अंत तक वहां सामान्य औसत से कम बारिश हुई थी लेकिन अगस्त में मानसून ने करवट बदला और फिर राज्य के विभिन्न जिलों में झमाझम वर्षा होने लगी।

कुछ जिलों में एकाएक अत्यन्त मूसलाधार बरसात होने से फसल को विशेष रूप से नुकसान हुआ है क्योंकि ये फसलें ज्यादा दिनों तक जल जमाव को बर्दाश्त नहीं कर पाती हैं।

दिलचस्प तथ्य यह है कि तेलंगाना में खरीफ फसलों की खेती का आदर्श समय अभी समाप्त नहीं हुआ है इसलिए क्षतिग्रस्त इलाकों में किसान दोबारा बिजाई कर रहे हैं। इसलिए उसके लागत खर्च में बढ़ोत्तरी हो जाएगी।