तेलंगाना में खरीफ फसलों के उत्पादन क्षेत्र में शानदार बढ़ोत्तरी

21-Aug-2025 10:55 AM

हैदराबाद। कई महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक राज्यों की तुलना में तेलंगाना में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा कम होने तथा बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर नीचे रहने के बावजूद खरीफ फसलों के उत्पादन क्षेत्र में शानदार बढ़ोत्तरी हुई है और इसका क्षेत्रफल गत वर्ष के 91.21 लाख एकड़ से 27.48 लाख एकड़ बढ़कर इस वर्ष 20 अगस्त तक 118.70 लाख एकड़ पर पहुंच गया। इसके तहत खासकर धान, मोटे अनाज एवं कपास आदि के रकबे में अच्छी वृद्धि हुई है। 

राज्य कृषि विभाग की नई रिपोर्ट के अनुसार गत वर्ष के मुकाबले चालू खरीफ सीजन के दौरान तेलंगाना में धान एवं मोटे अनाजों का कुल क्षेत्रफल 36.16 लाख एकड़ से उछलकर 61.28 लाख एकड़ पर पहुंच गया।

इसके तहत खासकर धान का उत्पादन क्षेत्र 31.61 लाख एकड़ से बढ़कर 54.80 लाख एकड़ तथा मक्का का रकबा 4.21 लाख एकड़ से बढ़कर 6.13 लाख एकड़ पर पहुंचा। ज्वार का बिजाई क्षेत्र  मामूली बढ़त के साथ 34 हजार एकड़ रहा। तेलंगाना धान-चावल का एक अग्रणी उत्पादक राज्य माना जाता है। 

दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र भी गत वर्ष के 5.12 लाख एकड़ से सुधरकर इस बार 5.56 लाख एकड़ पर पहुंचा। इसके तहत खासकर अरहर (तुवर) का बिजाई क्षेत्र 4.28 लाख एकड़ से बढ़कर 4.73  लाख एकड़ तथा उड़द का रकबा 19 हजार एकड़ से सुधरकर 22 हजार एकड़ पर पहुंचा मगर मूंग का बिजाई क्षेत्र 63 हजार एकड़ से गिरकर 60 हजार एकड़ पर अटक गया। 

लेकिन तिलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र पिछले साल के 3.90 लाख एकड़ से गिरकर इस बार 3.67 लाख एकड़ रह गया। इसके अंतर्गत खासकर सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 3.77 लाख एकड़ से घटकर 3.60 लाख एकड़ पर आ गया।

इसी तरह मूंगफली एवं अरंडी का रकबा भी गत वर्ष से पीछे चल रहा है जबकि इसकी बिजाई अपेक्षाकृत कम क्षेत्रफल में हुई है। 

तेलंगाना कपास के उत्पादन में गुजरात और महाराष्ट्र के बाद तीसरे नम्बर पर रहता है। 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में सरकारी एजेंसी-भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा तेलंगाना में ही किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर रूई की सर्वाधिक खरीद की गई थी।

इससे किसानों का उत्साह बढ़ गया। तेलंगाना में कपास का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 42.07 लाख एकड़ से उछलकर इस बार 44.92 लाख एकड़ पर पहुंच गया है जबकि गुजरात एवं महाराष्ट्र में कपास का रकबा घट गया है।