तिलहनों की शानदार पैदावार से खाद्य तेलों की उपलब्धता बढ़ी

19-Aug-2025 04:23 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि 2023-24 सीजन की तुलना में 2024-25 के मार्केटिंग सीजन के दौरान तिलहन फसलों का सकल उत्पादन 7.4 प्रतिशत बढ़कर 426 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

इसमें सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, सूरजमुखी एवं नाइजरसीड आदि तिलहन शामिल हैं। इस शानदार उत्पादन के कारण क्रशिंग-प्रोसेसिंग इकाइयों को कच्चे माल (तिलहनों) का ज्यादा स्टॉक प्राप्त हुआ जिससे खाद्य तेलों की उपलब्धता बढ़ गई। इसे देखते हुए विदेशों से खाद्य तेल के आयात में कुछ कमी आने की संभावना व्यक्त की जा रही है। 

वैश्विक बाजार भाव काफी ऊंचा होने से भारत में खाद्य तेलों का आयात महंगा बैठ रहा है और इसलिए पिछले कुछ महीनों से इसके घरेलू बाजार मूल्य में तेजी-मजबूती का माहौल बना हुआ है। जुलाई 2025 में खाद्य तेलों में खुदरा महंगाई दर 19.24 प्रतिशत दर्ज की गई। 

सॉल्वेंट एक्स ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा संकलित आंकड़ों से ज्ञात होता है कि 2023-24 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान भारत में कुल मिलाकर 159.60 लाख टन खाद्य तेलों का आयात हुआ जिसका मूल्य 1.32 लाख करोड़ रुपए रहा। इसमें क्रूड पाम तेल,

आरबीडी पामोलीन, क्रूड डीगम सोयाबीन तेल तथा क्रूड सूरजमुखी तेल शामिल था। इसका आयात इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, ब्राजील, रूस, यूक्रेन तथा रोमानिया जैसे देशों से किया गया। 

घरेलू प्रभाग में खाद्य तेलों की पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्ध सुनिश्चित करने तथा कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सरकार ने आयात शुल्क में कटौती कर दी है लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बाजार भाव ऊंचा रहने से घरेलू उपभोक्ताओं को इस शुल्क कटौती का समुचित लाभ हासिल न ही हो सका।

खरीफ कालीन तिलहन फसलों और खासकर सोयाबीन, मूंगफली एवं तिल का रकबा गत वर्ष से पीछे चल रहा है। सरसों एवं इससे तेल की कीमत काफी ऊंची हो गई है जिससे आगामी रबी सीजन में इसका बिजाई क्षेत्र बढ़ने की उम्मीद है।