तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए केन्द्र द्वारा विशेष प्रावधान

08-Apr-2026 04:26 PM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार तिलहन उत्पादन के मामले में देश को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। इसके तहत विभिन्न तिलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र, उसकी औसत उपज दर तथा सकल पैदावार बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए 10,103 करोड़ (101.03 अरब) रुपए  का विशेष प्रावधान किया गया है ताकि किसानों को पूरा सहयोग-समर्थन दिया जा सके। 

कृषि मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर पर तिलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र 290 लाख हेक्टेयर के वर्तमान स्तर से बढ़ाकर 330 लाख हेक्टेयर पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

इसी तरह तिलहन फसलों की औसत उपज दर 1353 किलो प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 2112 किलो प्रति हेक्टेयर पर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

यदि ये दोनों लक्ष्य हासिल हो गए तो तिलहनों का कुल उत्पादन 392 लाख टन के मौजूदा स्तर से उछलकर 697 लाख टन पर पहुंच सकता है। इससे खाद्य तेलों के आयात पर देश की निर्भरता काफी घट जाएगी और तिलहन उत्पादकों को बेहतर आमदनी भी प्राप्त हो सकेगी।

घरेलू उत्पादन बहुत कम होने से विदेशी खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता बढ़कर 58 प्रतिशत पर पहुंच  गई है। भारत लम्बे समय से दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे प्रमुख आयातक देश बना हुआ है। इसके आयात पर अत्यन्त विशाल धनराशि खर्च होती है।

भारत में खाद्य तेलों का आयात मुख्यतः इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, अर्जेन्टीना, ब्राजील, रूस, यूक्रेन एवं नेपाल से होता है। इसके अलावा कई अन्य देशों से भी थोड़ी-बहुत मात्रा में इसे मंगाया जाता है।