खाद्य तेलों की मांग एवं कीमत बढ़ने से उद्योग को राहत
08-Apr-2026 05:53 PM
मुम्बई। पिछले कुछ सप्ताहों से खाद्य तेलों का वैश्विक एवं घरेलू बाजार भाव ऊंचा चल रहा है जबकि इसकी मांग एवं खपत में भी अच्छी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। मार्च में पाम तेल एवं सोयाबीन तेल के आयात में गिरावट दर्ज की गई। शिपिंग खर्च बढ़ने से इसका आयात महंगा हो गया।
भारतीय रिफाइनर्स ने विदेशी खाद्य तेलों के बजाए घरेलू तेलों की खरीद पर ज्यादा ध्यान दिया। इससे सोयाबीन, मूंगफली एवं सरसों जैसी प्रमुख तिलहन फसलों का दाम भी मजबूत हो गया और किसानों को लाभप्रद आमदनी प्राप्त होने लगी।
खाद्य तेलों का भाव पहले से ही ऊंचा चल रहा था जबकि हाल के दिनों में इसमें 4-5 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोत्तरी हो गई। इससे उद्योग का राजस्व बढ़ गया। लेकिन आगे तेजी- मजबूती का माहौल बरकरार रहने में संदेह है। पश्चिम एशिया में युद्ध फिलहाल थम गया है और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही आरंभ हो गई है।
इससे खाद्य तेलों के आयात की गति सुधरने की संभावना है। क्रूड खनिज तेल का वैश्विक बाजार भाव तेजी से घटने लगा है जिससे जहाजों के किराया भाड़ा में भी कमी आने की संभावना है।
इसके अलावा निर्यातक देशों में खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट आ सकती है। केन्द्र सरकार इसके आयात शुल्क में कटौती करने पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है।
खाद्य तेलों का खुदरा बाजार भाव उछलकर काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है जिससे आम उपभोक्ताओं को भारी कठिनाई होने लगी है। यदि कीमतों में नरमी नहीं आई तो मांग प्रभावित हो सकती है।
