तापमान में वृद्धि एवं बारिश की कमी से गेहूं की फसल को नुकसान की आशंका

29-Jan-2025 08:30 PM

नई दिल्ली । देश के उत्तरी, पश्चिमी एवं पश्चिमोत्तर भाग में पिछले कुछ दिनों से दिन के तापमान में बढ़ोत्तरी हो रही है जबकि बारिश का अभाव देखा जा रहा है।

इसके फलस्वरूप खेतों की मिटटी में नमी का अंश घटता जा रहा है जो खासकर गेहूं की फसल के लिए अच्छी सूचना नहीं है।

हालांकि चालू रबी सीजन में गेहूं का घरेलू उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 324.38 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है जो पिछले सीजन के बिजाई क्षेत्र 315.63 लाख हेक्टेयर तथा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 312.35 लाख हेक्टेयर से काफी अधिक है मगर शानदार उत्पादन के लिए मौसम का अनुकूल रहना आवश्यक है।

अभी तक स्थिति चिंताजनक स्तर पर नहीं पहुंची है और यदि फरवरी में एक-दो बौछार पड़ जाए तथा तापमान में ज्यादा वृद्धि न हो तो फसल की हालत तेजी से सुधर सकती है। 

गेहूं का खुला बाजार भाव काफी ऊंचा तथा तेज चल रहा है और सरकार को इसे नियंत्रित करने में भारी कठिनाई हो रही है।

ऊंचे बाजार भाव के कारण केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की खरीद प्रभावित होगी या नहीं-इसका पता तो अप्रैल-मई में ही चल पाएगा जब नए माल की जोरदार आवक होगी

लेकिन इतना अवश्य कहा जा सकता है कि सरकार अधिक से अधिक मात्रा में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की खरीद सुनिश्चित करने के लिए अपनी ओर से कोई कोर कसर बाकी नहीं रखेगी।

सरकार के पास गेहूं का सीमित स्टॉक बचा हुआ है इसलिए वह इसका इस्तेमाल पूरी सावधानी से करना चाहती है। फरवरी-मार्च का मौसम गेहूं उत्पादन के लिए निर्यातक साबित हो सकता है।