टैरिफ बार के कारण खाद्य तेलों का भाव नरम पड़ने की संभावना
25-Apr-2025 03:13 PM
मुम्बई। चीन सहित अनेक देशों के साथ अमरीका का 'शुल्क संघर्ष' (टैरिफ बार) आरंभ होने से खाद्य तेलों का वैश्विक बाजार भाव प्रभावित हो रहा है जिससे भारत में इसके आयात खर्च में कमी आने लगी है।
अमरीका से परम्परागत तौर पर सोयाबीन का सर्वाधिक निर्यात चीन को होता रहा है मगर अब टैरिफ बार की वजह से वहां इसका शिपमेंट लगभग ठप्प पड़ गया है।
चीन इस बार अमरीकी दबाव में आगे झुकने के लिए तैयार नहीं है। अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा है कि सीमा शुल्क के मुद्दे पर चीन के साथ बातचीत जारी है लेकिन चीन ने कहा है कि फिलहाल अमरीका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है। अमरीकी सोयाबीन में एक अन्य महत्वपूर्ण आयात देश- मैक्सिको ने ब्राजील से तिलहन का आयात बढ़ाने का संकेत दिया है।
अमरीका में सोयाबीन एवं सोया तेल की कीमतों पर दबाव पड़ने लगा है। उधर ब्राजील में सोयाबीन की नई फसल की कटाई-तैयारी लगभग समाप्त हो चुकी है और वहां उत्पादकों के पास इसका विशाल स्टॉक मौजूद है।
अर्जेन्टीना में भी सोयाबीन के नए माल की आवक शुरू हो गई है। इससे सोया तेल के दाम में कुछ नरमी आने की संभावना है। मलेशिया में क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का वायदा भाव हाल के दिनों में नरम पड़ा है क्योंकि कमजोर नियत प्रदर्शन के कारण वहां इसका बकाया अधिशेष स्टॉक बढ़ रहा है। वैसे पिछले एक-दो दिन से सीपीओ के वायदा मूल्य में मजबूती का माहौल देखा जा रहा है।
भारत में क्रूड पाम तेल एवं आरबीडी पामोलीन के आयात खर्च में 7-8 प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि क्रूड डिगम्ड सोयाबीन तेल का आयात खर्च 11 से 21 अप्रैल के दौरान 48 डॉलर प्रति टन घट गया।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार यदि वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ता है अथवा लम्बे समय तक बरकरार रहता है तो खाद्य तेलों के मोर्चे पर भारत को अच्छी राहत मिल सकती है।
कुआलालम्पुर स्थित बुर्सा मलेशिया डेरिवेटिव्स (बीएमडी) एक्सचेंज में क्रूड पाम तेल के बेंचमार्क वायदा मूल्य में पिछले दो दिनों से मजबूती देखी जा रही है
लेकिन यदि सोयाबीन तेल का भाव नरम रहा तो पाम तेल का दाम भी ज्यादा ऊंचा नहीं रह पाएगा क्योंकि इससे निर्यात प्रदर्शन पर असर पड़ेगा। भारत में सरसों की जोरदार आवक होने से भी तेल की कीमत स्थिर बनी हुई है।
